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به دنبال جوابم، نه فقط تکرارِ دیروز
دلم می‌خواهد از شب رد شوم، تا صبحِ پیروز
اگر دنیا مرا در قاب خود محدود می‌خواهد
دلم از مرزهای بسته، عبورِ زود می‌خواهد
نه از تحسینِ مردم، مست می‌گردد دل من
نه با یک طعنه می‌ریزد تمام حاصل من
میانِ عقل و رؤیا، راه دشوار است و باریک
ولی ذهنم نمی‌ماند به یک پاسخ، نزدیک
من آن پرسش که در ذهنِ سکوتِ شب رها شد
من آن فکری که از تردید، یک روز آشنا شد
اگرچه گاه می‌ترسم ز فردای نیامده
هنوزم شوقِ دانستن به قلبم راه داده
من آهنگی که پایانش هنوز از راه نرسیده
صدای دختری که خویش را از نو آفریده

به دنبال جوابم، نه فقط تکرارِ دیروز دلم می‌خواهد از شب رد شوم، تا صبحِ پیروز اگر دنیا مرا در قاب خود محدود می‌خواهد دلم از مرزهای بسته، عبورِ زود می‌خواهد نه از تحسینِ مردم، مست می‌گردد دل من نه با یک طعنه می‌ریزد تمام حاصل من میانِ عقل و رؤیا، راه دشوار است و باریک ولی ذهنم نمی‌ماند به یک پاسخ، نزدیک من آن پرسش که در ذهنِ سکوتِ شب رها شد من آن فکری که از تردید، یک روز آشنا شد اگرچه گاه می‌ترسم ز فردای نیامده هنوزم شوقِ دانستن به قلبم راه داده من آهنگی که پایانش هنوز از راه نرسیده صدای دختری که خویش را از نو آفریده

راحیل رستگاریراحیل رستگاری
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(हो...)

(आ...)

चाहता हूँ पार करूँ रात का ये स्याह गहराव

अगर दुनिया बाँधे मुझे अपने फ़्रेम में

दिल चाहे टूटे हर बंद दरवाज़े की दीवार में

नहीं चाहिए मुझे लोगों की तारीफ़ों का नशा

ना किसी की तंज़ से टूटे मेरा ये भरोसा

अक्ल और ख़्वाबों के बीच पतली है डोर

पर मेरा ज़हन नहीं रुकता एक जवाब के पहले और

मैं वो सवाल हूँ जो रात की ख़ामोशी में खोया

मैं वो ख़याल हूँ जो शक से एक दिन जुड़ा था

डर लगता है कभी अनजाने कल से मुझको

फिर भी जानने का जुनून है दिल में बसा

(हो... हो...)

हूँ मैं वो धुन जिसका अंत अभी नहीं आया

एक लड़की जिसने खुद को फिर से बनाया

हर सुबह नई उम्मीद का सूरज लिए

आगे बढ़ती जाऊँ, कदम ना थमे कभी

मैं वो सवाल हूँ जो रात की ख़ामोशी में खोया

मैं वो ख़याल हूँ जो शक से एक दिन जुड़ा था

डर लगता है कभी अनजाने कल से मुझको

फिर भी जानने का जुनून है दिल में बसा

(जुनून है दिल में...)

हो सके तो रास्ता दिखा ओ मेरे साथी

इस सफ़र में हौसला बन मेरे हमराही

मैं वो सवाल हूँ जो रात की ख़ामोशी में खोया

मैं वो ख़याल हूँ जो शक से एक दिन जुड़ा था

डर लगता है कभी अनजाने कल से मुझको

फिर भी जानने का जुनून है दिल में बसा

(हो...)

(आ...)

(मैं वो सवाल...)

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