
Midnight Groove Smile
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Lyrics
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॥ श्री गणेशाय नमः ॥
॥ ॐ नमः शिवाय ॥
Part एक – माता पार्वती की भक्ति और भगवान शिव को पाने की तपस्या
अनुमानित अवधि: आठ–दस मिनट
एक. मंगलाचरण
[संगीत: मंदिर की घंटियाँ, शंखनाद, धीमा तानपुरा और बाँसुरी]
ॐ नमः शिवाय।
हर हर महादेव!
जय माता पार्वती!
प्रिय भक्तजनों, आप सभी का इस पावन धार्मिक कथा में हार्दिक स्वागत है।
आज हम सुनने जा रहे हैं भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह की अद्भुत कथा।
यह कथा केवल एक विवाह की कथा नहीं है, बल्कि यह सच्ची श्रद्धा, प्रेम, धैर्य, तपस्या और समर्पण की अमर गाथा है।
जिसमें एक ओर हैं देवों के देव महादेव, जो कैलाश पर्वत पर विराजमान रहते हैं, और दूसरी ओर हैं माता पार्वती, जो शक्ति का स्वरूप हैं।
तो आइए, अपने मन को भगवान शिव के चरणों में समर्पित करते हुए इस पावन कथा का आरंभ करते हैं।
बोलिए, भोलेनाथ की जय!
दो. माता सती और माता पार्वती का दिव्य संबंध
[संगीत: गंभीर और शांत वातावरण]
प्राचीन समय की बात है।
भगवान शिव का विवाह माता सती से हुआ था। माता सती भगवान शिव की परम भक्त और अर्धांगिनी थीं।
एक समय राजा दक्ष ने एक विशाल यग्य का आयोजन किया। इस आयोजन में उन्होंने भगवान शिव का उचित सम्मान नहीं किया।
इस घटना से माता सती अत्यंत दुखी हुईं। इसके बाद उन्होंने अपना सांसारिक जीवन त्याग दिया।
भगवान शिव संसार से विरक्त होकर गहन तपस्या में लीन हो गए।
समय बीतता गया और स्रिष्टि के कल्याण के लिए एक नई दिव्य लीला का आरंभ हुआ।
हिमालय पर्वत के राजा हिमवान और उनकी पत्नी रानी मैना के घर एक दिव्य कन्या ने जन्म लिया।
इस कन्या का नाम रखा गया पार्वती।
माता पार्वती बचपन से ही अत्यंत शांत, दयालु और धार्मिक स्वभाव की थीं।
वे प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा करतीं और उनके ध्यान में लीन रहतीं।
कहते हैं कि माता पार्वती के ह्रिदय में भगवान शिव के प्रति विशेष श्रद्धा और प्रेम था।
तीन. नारद मुनि की भविष्यवाणी
[संगीत: वीणा की मधुर ध्वनि]
एक दिन देवर्षि नारद हिमालय राज के महल में पधारे।
राजा हिमवान और रानी मैना ने उनका आदर-सत्कार किया।
राजा हिमवान ने नारद मुनि से विनम्रता से पूछा।
हे देवर्षि! क्रिपया हमारी पुत्री पार्वती के भविष्य के बारे में कुछ बताइए।
नारद मुनि ने माता पार्वती की हस्तरेखाएँ और उनके दिव्य गुण देखकर कहा।
हे हिमालय राज! आपकी पुत्री कोई साधारण कन्या नहीं हैं। ये साक्षात आदिशक्ति का स्वरूप हैं।
इनका विवाह संसार के सबसे महान योगी, भगवान शिव से होगा।
लेकिन भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती को कठिन तपस्या करनी होगी।
यह सुनकर माता पार्वती के मन में प्रसन्नता छा गई।
उन्होंने उसी समय संकल्प लिया