
Anand Ki Jashn
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Lyrics
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[Doha]
दीप जले हर आँगन में, सजी अवध की धाम,
लक्ष्मी मैया पधार रहीं, संग विराजे श्री राम।
[Chorus]
जगमग दीप जले चहुँ ओर, आया पावन त्योहार रे,
अवध नगर में राम विराजे, खुले भाग्य के द्वार रे।
जगमग दीप जले चहुँ ओर, आया पावन त्योहार रे,
घर आँगन में लक्ष्मी मैया, भरतीं सुख भंडार रे।
[Verse]
प्रथम मनाऊँ गणपति देवा, विघ्न हरन मंगल दाता,
रिद्धि सिद्धि संग आओ विराजे, तुम ही हो भाग्य विधाता।
रोली चंदन थाल सजाया, मोदक का है भोग लगा,
तेरे पावन चरण कमल से, सोया हुआ नसीब जगा।
[Chorus]
जगमग दीप जले चहुँ ओर, आया पावन त्योहार रे,
घर आँगन में लक्ष्मी मैया, भरतीं सुख भंडार रे।
[Verse]
कमल आसन पर मैया विराजीं, हाथों से धन बरसातीं,
जिस घर में हो प्रेम और श्रद्धा, उस आँगन में आ जातीं।
मिटे अंधेरा दरिद्रता का, उजियारा हर द्वार खिले,
तेरी दया की एक किरण से, जन्मों का संताप टले।
[Chorus]
जगमग दीप जले चहुँ ओर, आया पावन त्योहार रे,
अवध नगर में राम विराजे, खुले भाग्य के द्वार रे।
[Verse]
सरयू तीरे उत्सव भारी, गूँज उठी है जय जयकार,
चौदह बरस बाद रघुनाथा, लौटे अपने राज दुआर।
ढोल नगाड़े शंख बजें अब, झूम रहा संसार सारा,
जय श्री राम जय लक्ष्मी माता, गूँजे पावन जयकारा।
[Chorus]
जगमग दीप जले चहुँ ओर, आया पावन त्योहार रे,
अवध नगर में राम विराजे, खुले भाग्य के द्वार रे।
घर आँगन में लक्ष्मी मैया, भरतीं सुख भंडार रे,
जय श्री राम जय लक्ष्मी माता, कर दो भव से पार रे।