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Mann Ki Baat
Melancholic

Mann Ki Baat

Om HariOm Hari
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Style: Hindi Devotional Ballad, Indian Semi-Classical, Soulful Ghazal, Melancholic, Heartfelt, Slow Tempo, Melodious Male Vocals, Expressive Singing, Hindustani Classical, Bansuri, Harmonium, Soft Tabla, Gentle Violin, Orchestral Strings, Emotional Chorus, male vocal
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(गंभीर, भावुक आलाप)

जिन संत ने परहित के लिए जिया,

जिन संत ने सबका भार लिया,

आज उन्हीं संत की साँसों पर,

किसने इतना अधिकार लिया?

पीड़ाओं के घूँट पी रहे हैं,

बीमारियो से जूझ है,

क्या वेदना किसी के दिल में नहीं?

क्या पत्थर हो गए हर.... दिल हैं?

[मुखड़ा – तीखा, दर्दभरा दुख,

गुस्से में आक्रामक और दमदार कोरस]

साज़िश का जाल बिछाया,

सच को अनसुना कराया।

झूठे इल्ज़ाम लगाए,

धर्म की जड़े हिलाए,

निर्दोष संत को बेवजह सजा दिलाए।

कैसी घड़ी, ये कैसा दौर,

ये कैसा इंसाफ़ का व्यवहार?

एक संत तड़पते यहाँ,

और मौन खड़ा है संसार!

संत की पीड़ा कोई खेल नहीं,

ये कोई छोटा सवाल नहीं!

जिस देश में सच को सुनवाई न मिले,

उस देश का ये अच्छा हाल नहीं!

तेराह साल का दर्द दिया,

निर्दोष को कैसा ये इंसाफ़ दिया?

सच को दबाकर रख न पाओगे,

कर्मों का हिसाब चुकाओगे?

कब टूटेगा अन्याय का घेरा?

कब मिटेगा पीड़ा का अँधेरा?

कब सुनेगी दुनिया की अदालत,

एक संत की पुकार गहरी?

(कुछ क्षण मौन, फिर संगीत धीरे-धीरे तीव्र हो)

सत्ता के मद में ज़ुल्म किए,

सच को दबाया, सितम किए।

कानून को बनाया हाथो का इशारा,

कब तक टिकेगा झूठ का पसारा?

ये कैसी अदालत, ये कैसा न्याय?

सच बेबस खड़ा है, झूठ का राज!

एक संत की पीड़ा सुननी होगी,

हर अनसुनी चीख चुननी होगी।

निष्पक्ष जाँच, निष्पक्ष न्याय,

अब हर हाल में करनी होगी!

अब मौन नहीं, आवाज़ उठेगी,

सच की मशाल फिर से जलेगी।

अन्याय की हर दीवार गिरेगी,

इंसाफ़ की नई सुबह खिलेगी!

खुद आँधियों में दीप जलाएँ,

औरों को तूफ़ानों से बचाएँ।

अपनी पीड़ा कभी न जताएँ,

जग के आँसू चुपचाप सुखाएँ।

पत्थर मिले तो फूल लुटाएँ,

घाव मिले तो मरहम लगाएँ।

अपमान मिले तो मौन रह जाएँ,

बदले में भी आशीष लुटाएँ।

संत हैं तो प्रेम की दौलत,

संत हैं तो नेकी की राह।

संत हैं तो धरती पर रहमत,

संत हैं तो सुकून की पनाह।

संत ही चेतना, संत ही जीवन,

संतों से जग का अस्तित्व है।

संत न हों तो साँसें होंगी,

पर जीवन का न अस्तित्व है।

(बाँसुरी और कोमल वायलिन)

खुद आँधियों में दीप जलाएँ,

औरों को तूफ़ानों से बचाएँ।

पत्थर मिले तो फूल लुटाएँ,

बदले में भी आशीष लुटाएँ।

हे संत! आपकी करुणा अमर रहे,

आपके चरणों में जग का विश्वास रहे।

conclude... touching

हे संत! आपकी करुणा अमर रहे,

आपके चरणों में जग का विश्वास रहे।

(धीरे-धीरे संगीत समाप्त)

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