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Dada

Dada

Savita KumarSavita Kumar
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Style: Make a song about loafers of haryana and their aura in peoples.
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गली-गली में उनकी चाल, जैसे ज़मीन भी उनके क़दमों की धुन सुनती हो। आँखों में शोला, दिल में आग, और सीने में एक ऐसा जुनून जो बयां नहीं होता। लोग उन्हें देखकर दूर हट जाते हैं, मगर दिल में एक अजीब सी इज़्ज़त रखते हैं। डरते भी हैं, और मानते भी हैं—यही तो उनकी पहचान है, हरियाणे के लफंगों की। सुबह की पहली किरण से पहले उनकी बाइक की आवाज़ गाँव की सड़कों पर गूँजती है, और शाम ढलते ही उनकी ठिठोली चौपाल की रौनक बन जाती है। न कोई उन्हें छेड़ता, न कोई उनकी बराबरी करता। बस एक नज़र, और सब समझ जाते हैं कि यहाँ राज उन्हीं का है। उनकी बात में वज़न, कदम में ज़ोर, और हर हाव-भाव में एक रौब जो बताता है कि ये लफंगे सिर्फ़ शरारत नहीं, अपनी ज़मीन की मिसाल हैं। लोग कहते हैं, "इनसे दूर रहो," मगर चुपके से यह भी सोचते हैं, "काश, इनकी हिम्मत हममें होती।" उनकी मौजूदगी में बाज़ार की रौनक बढ़ जाती है, और चाय की दुकान पर उनकी हँसी सुनकर हर कोई मुड़कर देखता है। ये लफंगे न कोई रुतबा रखते हैं, न कोई ओहदा, फिर भी उनका नाम लेते ही लोग सिर हिलाते हैं—कभी डर से, कभी इज़्ज़त से। उनकी जेब में पैसे नहीं, मगर दिल में दरियादिली होती है; गुस्से में आग, मगर दोस्ती में मिट्टी की खुशबू। हर गली का कोना उनकी कहानियों से भरा है, हर मोड़ पर उनके क़दमों के निशान हैं। और जब वे हँसते हैं, तो लगता है जैसे पूरा गाँव उनके साथ झूम उठा हो। चाहे ठंडी छाँव हो या धूप की तपिश, उनकी चाल में वही ठहराव रहता है। उनकी बात में वज़न होता है, जैसे तराज़ू का पलड़ा कभी झूठ नहीं बोलता। कदमों में ज़ोर होता है, ज़मीन पर ऐसी पकड़ कि जैसे वे हर बार अपनी माटी को नमस्कार कर रहे हों। लोग उन्हें देखकर दूर से ही रास्ता बदल लेते हैं, मगर पास आकर सीना ठोककर कहते हैं, “ये तो हमारे अपने हैं।” उनकी रौब की छाप हर दिल में ऐसी बसती है जैसे दीपक की लौ अंधेरे में बस जाती है। वे जाते हैं, मगर उनकी कहानियाँ गलियों की दीवारों पर लिखी रहती हैं, बुज़ुर्गों की ज़ुबान पर सजी रहती हैं। धूप ढल जाती है, छाँव बदल जाती है, मगर उनके नाम की गूँज युगों तक सुनाई देती रहती है। यही तो है हरियाणा के लफंगों की आन—जो मिट्टी में जन्म लेती है, और आसमान तक अपनी कहानी लिख जाती है।

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