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Sitar Ki Sargam
Indian Classical

Sitar Ki Sargam

sandip patelsandip patel
0 likes1 plays2:18
Style: indian classical, sitar, tabla, tanpura, raaga, meditative, traditional
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Lyrics

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श्री गुरु चरण सरोज रज निजमन मुकुर सुधारि ।

वरणौ रघुवर विमलयश जो दायक फलचारि ॥

[Instrumental]

बुद्धिहीन तनुजानिकै सुमिरौ पवन कुमार ।

बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेश विकार ॥

[Instrumental]

अतुलित बलधामं स्वर्ण शैलाभ देहम् ।

दनुज वन क्रिशानुं ग्यानिना-मग्रगण्यम् ॥

सकल गुण निधानं वानराणा-मधीशम् ।

रघुपति प्रिय भक्तं वातजातं नमामि ॥

[Instrumental]

गोष्पदीक्रित वाराशिं मशकीक्रित राक्षसम् ।

रामायण महामाला रत्नं वन्दे-(अ)निलात्मजम् ॥

यत्र यत्र रघुनाथ कीर्तनं तत्र तत्र क्रितमस्तकाञ्जलिम् ।

भाष्पवारि परिपूर्ण लोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तकम् ॥

[Instrumental]

मनोजवं मारुत तुल्यवेगम् ।

जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥

वातात्मजं वानरयूथ मुख्यम् ।

श्री राम दूतं शिरसा नमामि ॥

[Instrumental]

जय हनुमान ग्यान गुण सागर ।

जय कपीश तिहु लोक उजागर ॥ एक ॥

[Instrumental]

रामदूत अतुलित बलधामा ।

अञ्जनि पुत्र पवनसुत नामा ॥ दो ॥

[Instrumental]

महावीर विक्रम बजरङ्गी ।

कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥ तीन ॥

[Instrumental]

कञ्चन वरण विराज सुवेशा ।

कानन कुण्डल कुञ्चित केशा ॥ चार ॥

[Instrumental]

हाथवज्र औ ध्वजा विराजै । [औरु]

कान्धे मूञ्ज जनेवू साजै ॥ पांच॥

[Instrumental]

शङ्कर सुवन केसरी नन्दन । [शङ्कर स्वयं]

तेज प्रताप महाजग वन्दन ॥ छह ॥

[Instrumental]

विद्यावान गुणी अति चातुर ।

राम काज करिवे को आतुर ॥ सात ॥

[Instrumental]

प्रभु चरित्र सुनिवे को रसिया ।

रामलखन सीता मन बसिया ॥ आठ॥

[Instrumental]

सूक्ष्म रूपधरि सियहि दिखावा ।

विकट रूपधरि लङ्क जलावा ॥ नौ ॥

[Instrumental]

भीम रूपधरि असुर संहारे ।

रामचन्द्र के काज संवारे ॥ दस ॥

[Instrumental]

लाय सञ्जीवन लखन जियाये ।

श्री रघुवीर हरषि उरलाये ॥ ग्यारह ॥

[Instrumental]

रघुपति कीन्ही बहुत बडायी (ई) ।

तुम मम प्रिय भरत सम भायी ॥ बारह ॥

[Instrumental]

सहस्र वदन तुम्हरो यशगावै ।

अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावै ॥ तेरह ॥

[Instrumental]

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा ।

नारद शारद सहित अहीशा ॥ चौदह ॥

[Instrumental]

यम कुबेर दिगपाल जहां ते ।

कवि कोविद कहि सके कहां ते ॥ पंद्रह ॥

[Instrumental]

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा ।

राम मिलाय राजपद दीन्हा ॥ सोलह ॥

[Instrumental]

तुम्हरो मन्त्र विभीषण माना ।

लङ्केश्वर भये सब जग जाना ॥ सत्रह ॥

[Instrumental]

युग सहस्र योजन पर भानू ।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ अठारह ॥

[Instrumental]

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही ।

जलधि लाङ्घि गये अचरज नाही ॥ उन्नीस ॥

[Instrumental]

दुर्गम काज जगत के जेते ।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥ बीस ॥

[Instrumental]

राम दुआरे तुम रखवारे ।

होत न आग्या बिनु पैसारे ॥ इक्कीस ॥

[Instrumental]

सब सुख लहै तुम्हारी शरणा ।

तुम रक्षक काहू को डर ना ॥ बाईस ॥

[Instrumental]

आपन तेज सम्हारो आपै ।

तीनों लोक हाङ्क ते काम्पै ॥ तेईस ॥

[Instrumental]

भूत पिशाच निकट नहि आवै

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