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Steel Tongue Rhythm
Hip-Hop

Steel Tongue Rhythm

M
MAX
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Style: RAP,male vocal, guitar, drums
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Lyrics

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[Intro]

कभी सोचा नहीं था...

ज़िंदगी इस मोड़ पर लाएगी...

जेब में सपने लेकर निकला था...

क्या पता था, हर खुशी इतनी आज़माएगी...

मैं भी हँसता था कभी...

मेरे भी कुछ अरमान थे...

आँखों में दुनिया जीतने के...

दिल में हज़ारों ख़्वाब थे...

[Verse 1]

छोटी सी दुनिया, मगर सपने बड़े थे,

खुद के भरोसे हम आगे बढ़े थे,

सोचा था एक दिन नाम कमाएँगे,

अपनों के चेहरों पर खुशियाँ सजाएँगे।

कभी कारोबार, कभी नए इरादे,

हर रोज़ लिखे मैंने सपनों के वादे,

कभी शुरू किया, कभी सब बिखर गया,

जिसपे भरोसा था, वक़्त वो भी बदल गया।

मेहनत की रातों का हिसाब नहीं है,

कितने आँसू छुपे, कोई जवाब नहीं है,

लोगों को दिखता है बस आज का चेहरा,

किसने देखा है अंदर का दर्द कितना गहरा?

[Chorus]

मेरी कहानी अभी ख़त्म नहीं,

मेरी आँखों में थोड़ी नमी सही,

मैं गिरा हूँ, मैं टूटा हूँ,

पर खुद से कभी रूठा नहीं।

कई इम्तिहान अभी बाकी हैं,

कई तूफ़ान अभी बाकी हैं,

दुनिया समझे मुझे हारा हुआ,

पर मेरे इरादे अभी बाकी हैं...

[Verse 2]

कभी स्क्रीन पे नंबर, कभी बाज़ार का खेल,

कभी मुनाफ़े की उम्मीद, कभी घाटे का मेल,

हर रणनीति के पीछे एक सपना था,

हर सौदे के साथ खुद को बदलने का इरादा था।

कभी लगा अब तो वक़्त बदलेगा,

कभी लगा किस्मत का दरवाज़ा खुलेगा,

पर बाज़ार ने सिखाया, हर चीज़ नहीं मिलती,

सिर्फ़ चाहने से मंज़िल नहीं मिलती।

कर्ज़ों का बोझ और सवालों की बारिश,

दिन में मुस्कुराहट, रातों में ख़्वाहिश,

कानून के रास्ते, तारीख़ों का सफ़र,

हर सुबह एक सवाल, हर शाम एक फ़िक्र।

पर सुन...

मैं भागा नहीं, मैं रुका नहीं,

मुश्किलों के आगे कभी झुका नहीं,

मेरी गलतियों ने मुझे बहुत कुछ सिखाया,

गिरकर ही मैंने खुद को पहचाना।

[Chorus]

मेरी कहानी अभी ख़त्म नहीं,

मेरी आँखों में थोड़ी नमी सही,

मैं गिरा हूँ, मैं टूटा हूँ,

पर खुद से कभी रूठा नहीं।

कई इम्तिहान अभी बाकी हैं,

कई तूफ़ान अभी बाकी हैं,

दुनिया समझे मुझे हारा हुआ,

पर मेरे इरादे अभी बाकी हैं...

[Verse 3]

मुझे महल नहीं, सुकून चाहिए,

अपनों के चेहरों पर जुनून चाहिए,

जिस घर ने मुझपे भरोसा रखा,

उस घर को एक बेहतर कल देना है।

मैं जानता हूँ वक़्त कठिन है,

हर मोड़ पर एक नई उलझन है,

पर जिसने अंधेरों में रास्ता ढूँढा,

उसके अंदर एक रोशनी आज भी ज़िंदा है।

ना ताज चाहिए, ना तालियों का शोर,

बस खुद से जीतना है एक बार और,

जो सपने कभी आँखों में सजाए थे,

उन सपनों को सच करके दिखाना है।

आज जेब खाली तो क्या हुआ?

आज रास्ता मुश्किल तो क्या हुआ?

मैं अपनी कहानी का किरदार हूँ,

किसी और के फैसले का मोहताज नहीं हूँ।

[Bridge]

कभी-कभी थक जाता हूँ...

कभी खुद से लड़ जाता ह

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