Back to home
Untitled

Untitled

Sunil G.V.Sunil G.V.
0 likes2 plays7:43
Style: Style / Genre: Indian Classical Devotional (Bhakti Sangeet / Dhrupad-inspired ambient) Mood & Tempo: Meditative, deeply soothing, spiritual, introspective, slow-paced (Vilambit / Madhya laya) Key Instruments: Lead / Melody: Ancient Bamboo Bansuri (Flute) and Rudra Veena, weaving delicate microtonal embellishments (meend and gamak) Rhythm & Percussion: Deep, resonant Pakhawaj strokes paired with subtle Temple Manjira (finger cymbals) and light earthen Mridangam Atmosphere & Drone: Resonant Tanpura drone in the background with soft ambient Swarpeti hum Vocal Style: Gentle, heartfelt semi-classical male or female devotional vocals, echoing ancient Sanskrit or Awadhi chanting traditions; smooth transitions, resonant sustain, and spiritual warmth Musical Structure: Alaap (Intro): Slow, unmetered bansuri and tanpura exploration establishing a tranquil, sacred atmosphere. Bandish / Bhajan (Core): Introduction of the soft Pakhawaj pulse and soothing vocals singing verses of surrender, peace, and divine grace. Outro: Gradual decrescendo into acoustic stillness, concluding on sustained tanpura reverberations and fading temple bells.

PRO & Creator Features

Unlock advanced AI features with Pro (Audio2Audio, Photo Covers, LoRA) or Creator (Voice Clone, Variations, Edit Sections, Stem Separation).

Audio2Audio Remix

Pro & Creator

Voice Clone

Creator

Create Variations

Creator only

Edit Sections

Creator only

Stem Separation

Creator only

[Verse] श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।। [Verse] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।। महावीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा।। हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे। कांधे मुंज जनेऊ साजे।। संकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन।। विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।। सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।। भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के kaj संवारे।। लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरंगि हरिचन्द लराये।। रहरि बीर हनुमान की जय।। बिसरे सुध बुध सकल तुम्हारी। राम भक्त तुम अति हितकारी।। लाय संजीवन लखन जियाये। श्रीरंगि हरिचन्द लराये।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।। सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।। जम कुबेर दिक्पाल जहां ते। कवि कोविद कहि सकैं कहां ते।। तुम सुग्रीवहि कीन्ह उपारा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।। तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना। लंक भए सब जग्र जाना।। जुग सहोय जो जन पर राखे। सोई तिन मारत भय भाखे।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।। सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।। सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।। भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के kaj संवारे।। लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरंगि हरिचन्द लराये।। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।। राम रसायन तुमरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।। तुमरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै।। अंतकाल रघुवर पुर जाई। जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।। और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्व सुथ करई।। संकट कटै मिटे सब पीरा। जो सुमिरे हनुमत बलबीरा।। जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।। जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।। तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।। [Verse] पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

Comments(0)

Sign in to join the conversation.

No comments yet. Be the first to comment!