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Kise Apna Kahoon
Acoustic

Kise Apna Kahoon

Sarthak ChauhanSarthak Chauhan
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Lyrics

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(हो...)

(हो... हो...)

किसे अपना कहूँ, किसे अजनबी

हर चेहरा बदलता रहा

जिसे दिल में जगह दी थी कभी

वही दूर चलता रहा

ना दोस्त रहा, ना प्यार रहा

ना घर का वो एहसास रहा

मैं सबका होकर भी देखो

क्यों सबसे ही उदास रहा

किसे अपना कहूँ, किसे अजनबी

(किसे अपना...)

हर चेहरा बदलता रहा

जिसे दिल में जगह दी थी कभी

(जगह दी थी...)

वही दूर चलता रहा

जिसके साथ हँसते थे कभी

वो आज नज़र चुराता है

बीते हुए उन लम्हों का

अब कौन हिसाब लगाता है

जिससे हर सपना जोड़ा था

वो सपना अधूरा छोड़ गई

मेरी खामोशी पढ़ने वाली

मुझसे ही नज़रें मोड़ गई

किसे अपना कहूँ, किसे अजनबी

(किसे अपना...)

हर चेहरा बदलता रहा

जिसे दिल में जगह दी थी कभी

वही दूर चलता रहा

(दूर चलता रहा...)

जिस आँगन में बचपन बीता

वो आँगन भी अब दूर हुआ

अपनों के बीच रहते-रहते

क्यों अपना ही दिल मजबूर हुआ

ना नफ़रत है, ना शिकायत है

बस थोड़ा सा एहसास रहा

(एहसास रहा...)

किसे अपना कहूँ, किसे अजनबी

(अजनबी...)

अब खुद को समझना सीख रहा

जो टूट गया था रिश्तों में

वो फिर से संभलना सीख रहा

मैं गिरकर भी चलना सीख गया

यही मेरा विश्वास रहा

(विश्वास रहा...)

किसे अपना कहूँ, किसे अजनबी

(हो...)

(किसे अपना...)

(हो... हो... हो...)

| सेक्शन | आठ (

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