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Shivam RoriyaLearn to sing thisKaraoke with live pitch — get a score on every lineSing →

घर खाली, घर खालो, मैंने घर खा लिया
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Style: ghar khaliya , ghar khalo, mene ghar kha liya
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शाम ढलते ही घर में सन्नाटा छा गया था। दीवारों पर लटकती घड़ी की टिक-टिक भी कुछ अजीब सी लग रही थी। मैंने चाय का कप उठाया, और पहली घूंट लेते ही कुछ हल्का-सा महसूस हुआ। दरअसल, मुझे लगा कि कोने में रखी कुर्सी थोड़ी हिली है। पर मैंने ध्यान नहीं दिया। फिर दीवार पर टँगी तस्वीर... वो मेरी माँ की थी, जो हर रोज़ मुस्कुराती दिखती थी। आज उसकी फ्रेम कुछ फीकी पड़ गई थी। मैंने सोचा, शायद रोशनी कम है। तभी मेरा हाथ चाय के कप पर गया, और कप खाली था। मैंने तो बस एक घूंट ली थी, बाकी चाय कहाँ गई?
मैं उठा, रसोई की तरफ बढ़ा। रास्ते में पड़ा कालीन... वो आधा सिमट गया था, जैसे किसी ने उसे खींचकर खा लिया हो। मैंने अपनी आँखें मलीं। क्या मैं थक गया हूँ? फिर मैंने देखा, दीवार पर लगा शीशा अब थोड़ा धुंधला था, और उसमें मेरा चेहरा नहीं, बल्कि एक गहरा साया दिख रहा था। मेरा दिल धड़कने लगा। मैंने अपना हाथ बढ़ाया, और शीशे को छुआ। वो छूते ही पिघल गया, जैसे मेरी उँगलियों ने उसे सोख लिया हो। और फिर... मुझे एहसास हुआ। हर चीज़ जो मैंने छुई, वो गायब हो रही थी। कुर्सी, तस्वीर, कालीन, शीशा... सब मेरे स्पर्श से खत्म हो रहे थे।
मैं चौंककर पीछे हटा, पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मेरा पेट भारी हो रहा था, और घर खाली होता जा रहा था। मैंने अपने हाथों को देखा—वे साफ थे, पर मुझे लगा जैसे मैंने खुद अपने घर को खा लिया है। हर दीवार, हर कोना, हर याद... सब मेरे भीतर समा गई। मैं खड़ा रहा, और धीरे-धीरे, मेरे होठों पर एक अजीब सी मुस्कान आ गई।
मैंने चारों ओर देखा। दीवारें नंगी थीं, कोने सूने थे, और हर याद जो कभी इन दीवारों में बसती थी, अब मेरे सीने में धड़क रही थी। मैंने सोचा—यह घर क्या था? लकड़ी और पत्थर? या वो हँसी जो यहाँ गूँजती थी, वो बातें जो रातों को होती थीं, वो खुशबू जो रसोई से आती थी? और तभी मुझे समझ आया। असली घर तो वह नहीं जो बाहर खड़ा होता है। असली घर तो वह है जो मैंने अपने भीतर बसा रखा है। हर पल, हर याद, हर एहसास—वही मेरा घर है। मैंने खाली फर्श पर बैठकर ठहाका लगाया। हँसी इतनी गहरी थी कि दीवारें गूँज उठीं। मैंने खुद से कहा, "मैंने घर नहीं खोया, मैंने घर को अपने भीतर उतार लिया।" और उस दिन से, जहाँ भी जाता हूँ, मेरा घर मेरे साथ चलता है। क्योंकि घर कोई जगह नहीं, घर तो एक एहसास है—और वो एहसास मेरे दिल में हमेशा के लिए बस गया।