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Ab Likhne Ka Mann Nahi Karta
Emotional

Ab Likhne Ka Mann Nahi Karta

kapil kumarkapil kumar
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Lyrics

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(हो...)

अब लिखने का मन नहीं करता

अब लिखने का मन नहीं करता

खूबसूरत दिखने का मन नहीं करता

शीशे में खुद को देखने का

मन नहीं करता, मन नहीं करता

खुद को जीतते हुए देखने का

अब मन नहीं करता जीने का

किसी के लिए मरने का

मन नहीं करता, मन नहीं करता

सब कुछ खत्म होते देखने को

अब मन नहीं करता, मन नहीं करता

(मन नहीं करता...)

सब कुछ खत्म होते देखने को

अब मन नहीं करता, मन नहीं करता

अब तो गालियाँ भी माँ-बाप की

पड़ती हैं प्यारी लगने को

मन करता है उनके पास जाने को

फिर से बच्चा बन जाने को

(फिर से बच्चा...)

इस जीवन में तो शायद

हो ना सकेगा, हो ना सकेगा

सब कुछ खत्म होते देखने को

अब मन नहीं करता, मन नहीं करता

(मन नहीं करता...)

सब कुछ खत्म होते देखने को

अब मन नहीं करता, मन नहीं करता

मरना ही पड़ेगा तो ही शायद

ये सपने सच होंगे

(सच होंगे...)

मरना ही पड़ेगा तो ही शायद

ये सपने सच होंगे

सब कुछ खत्म होते देखने को

अब मन नहीं करता, मन नहीं करता

(मन नहीं करता...)

सब कुछ खत्म होते देखने को

अब मन नहीं करता, मन नहीं करता

अब मन नहीं करता

कुछ भी लिखने जानने पढ़ने को

(मन नहीं करता...)

(हो...)

(मन नहीं करता...)

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