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Echoes Of Silence
Acoustic

Echoes Of Silence

PrateekPrateek
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Style: male vocal
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Lyrics

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[Intro]

देखो ना...

ज़रा देखो ना...

[Chorus]

पहाड़ तो देखे थे मैंने,

तुम्हें यूँ देखा न था।

धूप तो रोज़ उतरती थी,

तुम्हें यूँ खिलते देखा न था।

मैं कहता रहा, देखो ना,

तुम देखते रहे।

पहाड़ वहीं खड़े रहे,

हम बदलते रहे।

पहाड़ वहीं खड़े रहे,

हम बदलते रहे।

[Verse 1]

धूप उतरी चोटियों से,

बादल ठहरते रहे।

तुम्हारी आँखों में चुपके,

मौसम उतरते रहे।

मैं राह पहचानता था,

तुम रुक के देखते थे।

मेरी जानी-पहचानी राहें,

नई सी लगती थीं।

[Chorus]

पहाड़ तो देखे थे मैंने,

तुम्हें यूँ देखा न था।

मैं कहता रहा, देखो ना,

तुम देखते रहे।

पहाड़ वहीं खड़े रहे,

हम बदलते रहे।

[Verse 2]

शहर तुम्हें हर रोज़,

कुछ बनने को कहता था।

यहाँ नदी का किनारा,

बस होने को कहता था।

न हवा ने कुछ पूछा,

न पत्थर ने नाम लिया।

पानी बोलता रहा,

हम दोनों चुप रहे।

[Bridge]

एक मोड़ पर तुम ठहरे,

मैंने पुकारा नहीं।

तुम्हारी नज़र पहाड़ों पर,

मेरी नज़र तुम पर थी।

न कोई नाम, न किरदार,

तुम बस तुम थे उस घड़ी।

तुम्हारी आँखों में दुनिया थी,

मेरी दुनिया वहीं।

मेरी दुनिया वहीं...

[Verse 3]

तस्वीरों में तुम थे,

पर वो तुम थे ही नहीं।

कैमरे की तरफ़ देखा,

तस्वीर में रह गए।

पहाड़ों की तरफ़ देखा,

मुझमें उतर गए।

[Pause]

दुनिया तो दिख जाती है,

देखने वाले नहीं।

[Final Chorus]

पहाड़ तो देखे थे मैंने,

तुम्हें यूँ देखा न था।

धूप तो रोज़ उतरती थी,

तुम्हें यूँ खिलते देखा न था।

मैं कहता रहा, देखो ना,

तुम देखते रहे।

पहाड़ वहीं खड़े रहे,

हम बदलते रहे।

तुम्हें दुनिया मिल गई थी,

मुझे तुम फिर मिले।

पहाड़ वहीं खड़े रहे,

हम बदलते रहे।

हम बदलते रहे...

[Outro]

अब भी शहर की मुंडेर पे,

धूप जब ठहरती है।

बिन मुड़े ही होंठों से,

वही पुकार निकलती है।

देखो ना...

ज़रा देखो ना...

वो पहाड़...

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