Back to home
Untitled

Untitled

Pinky SinghPinky Singh
0 likes1 plays7:57
Style: fast devotional Hanuman Chalisa path, single male chanting voice, crisp Hindi diction, steady rhythmic delivery, faint tanpura drone, subtle dholak pulse, very minimal instrumentation, dry vocals

PRO & Creator Features

Unlock advanced AI features with Pro (Audio2Audio, Photo Covers, LoRA) or Creator (Voice Clone, Variations, Edit Sections, Stem Separation).

Audio2Audio Remix

Pro & Creator

Voice Clone

Creator

Create Variations

Creator only

Edit Sections

Creator only

Stem Separation

Creator only

[Intro] [Style: fast recitation, clear pronunciation] [Verse] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर ॥ रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी ॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा ॥ हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे। कांधे मुंज जनेऊ साजे। शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन ॥ विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर ॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया ॥ सूक्ष्म रूप धरि सियाहि दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा ॥ भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे ॥ लाय सजीवन लखन जियाये। श्री रघुवर हर्षि उर लाये ॥ रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥ सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा ॥ जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कवि कोविद कहि सके कहाँ ते ॥ तुम सुग्रीवहि कीन्ह उपारा। राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥ तुम्रो मन्त्र बिभीषन माना। लंका भए सब जग्र जाना ॥ युग सहस्र योजन पर भानू। लील्यो तहि मधुर फल जानू ॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ॥ दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्रो तेते ॥ राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना ॥ आपन तेज संहारो आपै। तीनों लोक हाँक तैं कापें ॥ भूत पिशाच निकट नहीं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै ॥ नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥ संकट ते हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥ सब पर राम तपस्वी राजा। इनके काज सकल तुम साजा ॥ और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै ॥ चारों जुग परताप आपका। है परसिद्ध जगत उजियारा ॥ साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे ॥ अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता ॥ राम रसायन तुम्रे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा ॥ तुम्रे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै ॥ अंतकाल रघुवर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई ॥ और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्व सुख करई ॥ संकट कटै मिटे सब पीरा। जो सुमरे हनुमत बलबीरा ॥ जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करो गुरुदेव की नाईं ॥ जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदी महासुख होई ॥ जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥

Comments(0)

Sign in to join the conversation.

No comments yet. Be the first to comment!