
Shri Suktam Dharana
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Lyrics
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धनंअग्निर धनंवायुर धनंसूर्यो धनंवसु |
धनमिन्द्रो ब्रहास्पतिर्वरुनम धनमस्तु में ||
वैनतेय सोमं पिब सोमं पिबतु व्रित्रहा |
सोमं धनस्य सोमिनो मह्यं ददातु सोमिनः ||
न क्रोधो न च मात्सर्यं न लोभो नशुभामती |
भवन्ति क्रित्पुन्यानाम भक्तानाम श्री सूक्तं जपेत सदा ||
वर्शन्तु ते विभावरी दिवो अभ्रस्य विदयुत:|
रोहंतु सर्व बीज्यान्य व ब्रम्हद्विषोजही ||
पध्मप्रिये पधमिनी पध्महस्ते पध्ममालये पध्मदलायाताक्षी
विश्वप्रिये विष्णुमनोनुकूले त्वत्पाद पध्मं मयि सनिधत्स्व ||
या सम पध्मासनस्थां विपुलकटीतटी पध्मपात्रायताक्षी |
गंभीरा वर्तनाभी स्तनभरनमिता शुभ्रवस्त्रोत्तरिया ||
लक्ष्मी र्दिव्यई गजेन्द्रं मणीगणखचिते स्नापिता हेमकुम्भे: |
नित्यं सा पद्मा हस्ता मम वसतु ग्रिहे सर्वमांगल्य युक्तां ||
लक्ष्मीं क्षीर समुद्र राज तनयाम श्रीरंगधामेश्वरी |
दासीभूत समस्त देव वनिताम लोकैक दीपंकुराम ||
श्री मन्मंद कटाक्ष लब्ध विभव ब्रम्हैन्द्र गंगाधराम |
त्वां त्रैलोक्य कुटुम्बिनीम सरसिजाम वन्दे मुकुंदप्रियां ||
सिद्धलक्ष्मीर्मोक्षलक्ष्मी जयलक्ष्मीर्सरास्वती |
श्रीलक्ष्मी र वरलक्ष्मीस्च प्रसन्ना मम सर्वदा ||
वरान्कुशो पाशम भीती मुद्रां करे वरहंती कमलासनस्थां |
बालार्क कोटि प्रतिभाम त्रिनेत्रं भजेह मध्याम जग्दीश्वरीम त्वां ||
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके |
शरण्ये त्र्यम्बकं देवी नारायणी नमोस्तुते ||
सरसिजनिलये सरोज हस्ते धवलतरांशुकगंधमाल्यशोभे |
भगवती हरिवल्लभे मनोग्ये
त्रिभुवनभूतिकरी प्रसीद मह्यं ||
विष्णुपत्निम क्षमां देवीम मधावीम माधवप्रियाम |
विष्णु प्रियसखीम देवीं नमाम्यच्युत्वल्लाभाम ||
महालक्ष्मी च विद्महे विष्णुपत्नी च धीमहि |
तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात ||
श्रीर्वर्चास्व्मायुश्यमरोग्यमविधापव्मानं महीयते |
धान्यं धनं पशुं बहुपुत्रलाभं शत संवत्सरं दीर्ध्मायु :||
रिण रोगादि दारिद्रय पाप क्षुदप म्रित्यु व: |
भयशोकमनस्तापा नश्यन्तु मम सर्वदा ||
य एवं वेद||
ॐ महा देव्यै च विद्महे विष्णु पत्नी च धीमहि |
तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात ||
ॐ शांति : शांति : शांति :