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Nazar Na Lag Jaaye
Romantic

Nazar Na Lag Jaaye

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Style: Bollywood romantic-pop with playful bass, crisp restrained drums, funky guitar, glossy synths, and subtle Indian melodic touches; youthful, confident, coy male lead with teasing emphasis, expressive pauses, playful inflections, light giggles, and rich harmonies; steady low-tempo groove with a gentle chorus bounce; polished urban-pop production
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Lyrics

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[Mukhda]

तेरे होंठों से शुरू होकर,

तेरे रुख़सार तक जाना है,

आज इस रात को धीरे-धीरे,

तेरे हर राज़ से मिलवाना है।

एक बोसा तेरी पेशानी पर,

एक तेरी पलकों के नाम,

एक तेरे गालों की ख़ातिर,

एक तेरी हँसी के नाम।

[Verse 1]

पहले माथे पे शाम रखूँ मैं,

फिर पलकों पे ख़्वाब धरूँ,

तेरी बंद आँखों की चुप्पी में,

अपने होने का रंग भरूँ।

तेरी नाक की नन्ही-सी नोक पे,

एक शरारत छोड़ आऊँ,

तेरे गालों के गुलाबी मौसम में,

कुछ देर ठहरता जाऊँ।

तेरी ठोड़ी पे आकर रुक जाऊँ,

जैसे दरिया किनारा छुए,

तू मुस्कुराकर आँखें खोले,

और मेरा सारा सब्र टूटे।

[Mukhda]

होंठों से छू लूँ, तो क्या बात हो,

तेरी धड़कन में बरसात हो।

मैं कोई लम्हा नहीं चाहता,

जो बस गुज़रे, मुलाक़ात हो।

[Verse 2]

तेरे कानों के पीछे कहीं,

एक मीठा-सा राज़ रखूँ,

तेरी ज़ुल्फ़ों को हटाकर जानम,

एक बोसा तेरे नाम रखूँ।

तेरी गर्दन की ढलती लकीरों पर,

चाँदनी का सफ़र लिखूँ,

तेरे कंधे पे ठहरी लट को,

अपने होंठों से बेअसर करूँ।

तू हल्के से मेरा नाम पुकारे,

मैं आवाज़ में खो जाऊँ,

तेरे कंधे से फिसलती ज़ुल्फ़ों में,

अपनी रात सजाऊँ।

[Mukhda]

होंठों से छू लूँ, तो क्या बात हो,

तेरी धड़कन में बरसात हो।

मैं कोई लम्हा नहीं चाहता,

जो बस गुज़रे, मुलाक़ात हो।

[Verse 3]

तेरे खुले हुए बालों में,

मेरी उँगलियाँ उलझ जाएँ,

तेरी रेशमी-सी पोशाक के,

किनारे ख़्वाब बन जाएँ।

तेरी बाँहों के घेरे में आकर,

मैं दुनिया को भूल जाऊँ,

तेरी हथेली पर होंठ रखकर,

अपनी सारी प्यास बुझाऊँ।

तू जो पास मेरे आ जाए,

तो लफ़्ज़ कहाँ रह जाते हैं,

कुछ बोसे कह जाते हैं वो बातें,

जो शायर कह नहीं पाते हैं।

[Bridge]

ज़रा गर्दन इधर तो करना...

ये ज़ुल्फ़ बहुत परेशान करती है।

ज़रा आँखें बंद तो करना...

ये नज़र बहुत शरारत करती है।

और सुनो...

हर बोसा मंज़िल नहीं होता,

कुछ रास्ते भी ख़ूबसूरत हैं,

तुम्हारे जिस्म के नक़्शे पर,

मेरी चाहत की कुछ आयतें हैं।

[Mukhda]

तेरे होंठों से शुरू हुआ था,

अब तेरी रूह तलक जाना है,

इस रात के सफ़ेद काग़ज़ पर,

तेरा नाम लिखते जाना है।

सुबह जब आईना देखे तुझको,

तो कुछ मुस्कान नई पाए,

और तेरे होंठों की ख़ामोशी,

मेरी रात की कहानी सुनाए...

होंठों से छू लो...

कि रात अभी बाक़ी है...

कि इश्क़ का सफ़र अभी बाक़ी है...

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