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अरुण रथ पर आओ भास्कर
सूर्यदेव स्तुति – मौलिक हिंदी भजन
[प्रारंभ – मधुर आलाप]
ॐ सूर्याय नमः...
जय आदित्य देव... जय भास्कर भगवान...
[Chorus]
अरुण रथ पर आओ भास्कर, नव प्रभात जगाओ,
सोई हुई इन दिशाओं में, स्वर्णिम रंग सजाओ।
जय आदित्य देव, जय दिनकर, जय रवि, जय भास्कर,
तेरी ज्योति से जगमग हो, धरती और अंबर।
[Verse 1]
सात अश्वों के रथ पर बैठे, नभ-पथ पर तुम आते,
अरुण सारथी रथ संभाले, किरणें जग में छाएँ।
रात का गहरा तम हरकर, जग को राह दिखाते,
पहली किरण के संग-संग तुम, आशा दीप जलाते।
[Chorus]
अरुण रथ पर आओ भास्कर, नव प्रभात जगाओ,
सोई हुई इन दिशाओं में, स्वर्णिम रंग सजाओ।
जय आदित्य देव, जय दिनकर, जय रवि, जय भास्कर,
तेरी ज्योति से जगमग हो, धरती और अंबर।
जय आदित्य देव, जय दिनकर, जय रवि, जय भास्कर,
तेरी ज्योति से जगमग हो, धरती और अंबर।
[Verse 2]
प्रातः जल की अंजलि लेकर, भक्त तुम्हें मनाते,
श्रद्धा के निर्मल भावों से, शीश तुम्हारे झुकाते।
आदित्य, सविता, विवस्वान, नाम तुम्हारे गाएँ,
भास्कर, रवि, दिवाकर कहकर, शीश नवाते जाएँ।
[Verse 3]
तेरी किरणें धरती पर जब, स्वर्णिम रंग बिखेरें,
वन-उपवन और खेतों में, सुंदर सपने उभरें।
श्रम करने वाले हाथों में, नई उमंग जगाएँ,
तेरे प्रकाश से जीवन के, सारे रंग निखर जाएँ।
[Chorus]
अरुण रथ पर आओ भास्कर, नव प्रभात जगाओ,
सोई हुई इन दिशाओं में, स्वर्णिम रंग सजाओ।
जय आदित्य देव, जय दिनकर, जय रवि, जय भास्कर,
तेरी ज्योति से जगमग हो, धरती और अंबर।
जय आदित्य देव, जय दिनकर, जय रवि, जय भास्कर,
तेरी ज्योति से जगमग हो, धरती और अंबर।
जय आदित्य देव, जय दिनकर, जय रवि, जय भास्कर,
तेरी ज्योति से जगमग हो, धरती और अंबर।
[Verse 4]
जब मन में संशय छा जाए, धीरज तुमसे पाएँ,
सत्य और सद्कर्मों के पथ पर, बढ़ते हम जाएँ।
बल, विवेक और शुभ संकल्पों का, दीप ह्रिदय में धर दो,
अपने हित के साथ जगत का, मंगल करना सिखला दो।
[Outro]
विश्वचक्षु हे दिवाकर, वंदन बारंबार,
तेरे चरणों में अर्पित है, श्रद्धा और सत्कार।
जय आदित्य देव, जय दिनकर, जय रवि, जय भास्कर,
तेरी ज्योति से जगमग हो, धरती और अंबर।
ॐ सूर्याय नमः...
ॐ भास्कराय नमः...
जय सूर्यनारायण भगवान...
जय सूर्यनारायण भगवान...