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यहाँ आपके पूरे गाने का अंतिम और तैयार टेक्स्ट है जिसे आप आसानी से कॉपी कर सकते हैं:
[Intro]
ओऽऽऽ... आऽऽऽ... हाऽऽऽ...
किससे कहूँ... क्या हाल है मेरा...
ख़ामोश है लब... मगर रोता है दिल मेरा...
[Chorus]
ग़म के अंधेरे में जी रहा हूँ,
ना जी रहा हूँ, ना मर रहा हूँ...!
हँसता हूँ दुनिया के सामने,
अंदर ही अंदर बिखर रहा हूँ...!
ना कोई अपना, ना कोई सहारा,
कैसा है ये मुक़द्दर हमारा...!
[Verse 1]
जिनसे उम्मीदें लगाई थीं मैंने,
वही छोड़कर रास्ते चले गए...
जिनको समझा था अपना कभी,
वही दर्द देकर पराये हुए...
अब रातों से बातें करता हूँ,
ख़ुद से ही सवाल करता हूँ...
क्यों इतना ख़ामोश हूँ मैं,
क्यों हर पल यूँ बिखर रहा हूँ...!
[Chorus]
ग़म के अंधेरे में जी रहा हूँ,
ना जी रहा हूँ, ना मर रहा हूँ...!
[Verse 2]
कुछ ख़्वाब थे मेरी आँखों में,
कुछ अपने थे मेरी राहों में...
वक़्त ने ऐसा ज़ख़्म दिया,
अब रंग नहीं हैं निगाहों में...
किसको सुनाऊँ दर्द अपना,
कौन समझेगा हाल मेरा...
भीड़ में रहकर भी तन्हा हूँ,
ख़ुद में ही कहीं खो रहा हूँ...
[Bridge]
माँ... तेरी याद बहुत आती है...
बाबा... तेरी कमी सताती है...
काश कोई पूछे प्यार से,
बेटा... तू इतना उदास क्यूँ है...?
[Chorus]
ग़म के अंधेरे में जी रहा हूँ,
ना जी रहा हूँ, ना मर रहा हूँ...
टूटे हुए इस दिल के साथ,
हर रोज़ नया दिन काट रहा हूँ...
ओऽऽऽ... आऽऽऽ... हाऽऽऽ...
मैं ख़ुद को ही ढूँढ़ रहा हूँ...
(Fade Out – आवाज़ धीरे-धीरे धीमी होकर ख़ामोश होती हुई...)
हूँ... ऊँहूँ... आऽऽऽ...
— Vikram Dev Singh