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Gham Ke Andhere Mein
Acoustic

Gham Ke Andhere Mein

V
Vikram Dev Singh
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Lyrics

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(हो...)

किससे कहूँ क्या हाल है मेरा

ख़ामोश है लब मगर रोता है दिल

ग़म के अंधेरे में जी रहा हूँ

ना जी रहा हूँ ना मर रहा हूँ

हँसता हूँ दुनिया के सामने

अंदर ही अंदर बिखर रहा हूँ

ना कोई अपना ना कोई सहारा

कैसा है ये मुक़द्दर हमारा

ग़म के अंधेरे में जी रहा हूँ

ना जी रहा हूँ ना मर रहा हूँ

(ना मर रहा हूँ...)

टूटे हुए इस दिल के साथ

हर रोज़ नया दिन काट रहा हूँ

जिनसे उम्मीदें लगाई थीं मैंने

वही छोड़कर रास्ते चले गए

जिनको समझा था अपना कभी

वही दर्द देकर पराये हुए

अब रातों से बातें करता हूँ

ख़ुद से ही सवाल करता हूँ

ग़म के अंधेरे में जी रहा हूँ

ना जी रहा हूँ ना मर रहा हूँ

(ना जी रहा हूँ...)

टूटे हुए इस दिल के साथ

हर रोज़ नया दिन काट रहा हूँ

माँ तेरी याद बहुत आती है

बाबा तेरी कमी सताती है

काश कोई पूछे प्यार से

बेटा तू इतना उदास क्यों है

ग़म के अंधेरे में जी रहा हूँ

ना जी रहा हूँ ना मर रहा हूँ

(ना मर रहा हूँ...)

टूटे हुए इस दिल के साथ

हर रोज़ नया दिन काट रहा हूँ

(हो...)

मैं ख़ुद को ही ढूँढ़ रहा हूँ

(हो... आ...)

ख़ामोश दिल...

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