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Deep Resonance
Hip-Hop

Deep Resonance

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atharva Joshi
0 likes1 plays3:45
Style: Heavy bass, male vocal
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Lyrics

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॥ श्री रुद्राष्टकम् ॥

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं।

विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपम्॥

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं।

चिदाकाशमाकाशवासं भजेहम्॥ एक॥

निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं।

गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशम्॥

करालं महाकाल कालं क्रिपालं।

गुणागार संसारपारं नतोहम्॥ दो॥

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं।

मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम्॥

स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा।

लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा॥ तीन॥

चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं।

प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्॥

म्रिगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं।

प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि॥ चार॥

प्रचण्डं प्रक्रिष्टं प्रगल्भं परेशं।

अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम्॥

त्रयः शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं।

भजेहं भवानीपतिं भावगम्यम्॥ पांच॥

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी।

सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी॥

चिदानन्दसन्दोह मोहापहारी।

प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी॥ छह॥

न यावद् उमानाथ पादारविन्दं।

भजन्तीह लोके परे वा नराणाम्॥

न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं।

प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम्॥ सात॥

न जानामि योगं जपं नैव पूजां।

नतोहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम्॥

जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं।

प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो॥ आठ॥

॥ रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।

ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति॥

॥ इति श्री गोस्वामी तुलसीदासक्रितं श्रीरुद्राष्टकं सम्पूर्णम् ॥

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