
Ritmo De La Noche
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Lyrics
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[Intro]
ओम शांति, शांति, शांति
[Verse 1]
चेतना जगी, मिट तम सारा।
गुरुदेव कृपा, मिला सहारा।
भव के बंधन टूटे सारे।
खुले मुक्ति के द्वार हमारे।
[Verse 2]
मन-गजवर ने खाई लांघी।
संयम की जब डोरी बांधी।
छूटा माया का हर छोर।
रत्न-त्रय पथ, संग चेतना भोर।
[Verse 3]
कर्म-बंध सब पथ पर मिटे।
गुरु-पथ पर ही चरण टिके।
ध्रुव-सा अडिग रहा मन मेरा।
साक्षी बन देखे जग-घेरा।
[Chorus]
सोपान-सोपान शांति की ओर।
मुक्ति यही, यही शांति-छोर।
[Verse 4]
कर्मों की आंधी में भटका।
राग-द्वेष में मन है अटका।
अहिंसा का दीप जला दो।
संयम-पथ पर चलना सिखा दो।
[Chorus]
हे शांति गुरुवर, कृपा बरसा दो।
आत्म-बोध की ज्योति जगा दो।
[Verse 5]
माया का जग नश्वर सवेरा।
ध्रुव-धाम चेतन का बसेरा।
सद्ग्यान-दर्शन ज्योत जगा दो।
समभाव की सरिता बहा दो।
[Chorus]
हे शांति गुरुवर, कृपा बरसा दो।
आत्म-बोध की ज्योति जगा दो।
[Verse 6]
छूटे परिग्रह के बंधन सारे।
निज स्वरूप को आतम निहारे।
वीतराग वाणी रस पिला दो।
शिव-पथ का पथिक हमें बना दो।
[Chorus]
हे शांति गुरुवर, कृपा बरसा दो।
आत्म-बोध की ज्योति जगा दो।
[Outro]
ओम शांति, शांति, शांति