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Rab Se Maut Maang Li
Ballad

Rab Se Maut Maang Li

Sameer KhanSameer Khan
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Lyrics

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(हो...)

कभी-कभी इंसान सब कुछ पाकर भी

अधूरा रह जाता है

रब ने मुझको बोला अब तू मांग ले कुछ भी

मैंने रब से अब तो खुद की मौत मांग ली

मौत तो दे दूँ तुझको पर मैं उसे क्या कहूँ

जिसने तेरी ज़िंदगी दुआ में मांग ली

तू ही बता अब मैं कहाँ जाऊँ

किसके सहारे ये दर्द छुपाऊँ

जिसको चाहा था अपनी दुनिया

उसी के बिना कैसे जी पाऊँ

(कैसे जी पाऊँ...)

तेरी यादों में रातें गुज़रती हैं

मेरी आँखें बस तेरा रास्ता तकती हैं

तू तो चली गई मुझे छोड़कर

यहाँ साँसें भी मुझसे सवाल करती हैं

रब ने मुझको बोला अब तू मांग ले कुछ भी

मैंने रब से अब तो खुद की मौत मांग ली

मौत तो दे दूँ तुझको पर मैं उसे क्या कहूँ

जिसने तेरी ज़िंदगी दुआ में मांग ली

(दुआ में मांग ली...)

ना कोई शिकवा ना कोई शिकायत

बस दिल में बाकी तेरी ही चाहत

तू खुश रहे बस इतनी दुआ है

चाहे अधूरी रह जाए मेरी मोहब्बत

तू ही बता अब मैं कहाँ जाऊँ

किसके सहारे ये दर्द छुपाऊँ

जिसको चाहा था अपनी दुनिया

उसी के बिना कैसे जी पाऊँ

रब ने मुझको बोला अब तू मांग ले कुछ भी

मैंने रब से अब तो खुद की मौत मांग ली

(मौत मांग ली...)

अब ना कोई उम्मीद है ना कोई इंतज़ार

तू जहाँ भी रहे खुश रहे

बस इतना ही मेरा प्यार है

(हो...)

(हो... हो...)

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