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बाल हनुमान और सूर्य की कथा

बाल हनुमान और सूर्य की कथा

Aakash SinghAakash Singh
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Style: Bal Hanuman aur suraj ki kahani — bachchon ke liye sone se pehle ki katha

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बहुत समय पहले की बात है, जब बाल हनुमान बहुत छोटे और नटखट थे। वे अपनी माँ अंजनी के साथ एक सुंदर वन में रहते थे। एक सुबह, जब सूरज की पहली किरणें पहाड़ियों पर चमक रही थीं, बाल हनुमान को बहुत तेज़ भूख लगी। उनका पेट जोर से गुड़गुड़ाया। वे इधर-उधर देखने लगे, पर उन्हें खाने के लिए कुछ नहीं मिला। तभी उनकी नज़र आसमान की तरफ गई। वहाँ एक बड़ा, गोल और लाल-नारंगी फल लटका हुआ था। ऐसा पका हुआ, मीठा फल उन्होंने कभी नहीं देखा था। बाल हनुमान बहुत खुश हो गए। वे सोचने लगे, "वाह! कितना बड़ा और सुंदर फल है! यह तो बहुत स्वादिष्ट होगा।" उनका मन बाग-बाग हो गया। उन्होंने ठान लिया कि उस फल को ज़रूर खाएँगे। बाल हनुमान ने ज़ोर लगाया और अपनी छोटी सी टाँगों से ज़मीन पर पटक मारी। एक छलांग लगाई, और देखते ही देखते वे आकाश की ओर उड़ने लगे। उनकी माँ अंजनी चिल्लाई, "बेटा, रुको! कहाँ जा रहे हो?" पर बाल हनुमान तो बस उस चमकीले फल की तरफ बढ़ते चले गए। उन्हें लगा, वह फल उनका इंतज़ार कर रहा है। आकाश और ऊँचा होता गया, पर बाल हनुमान का उत्साह कम नहीं हुआ। उनकी आँखों में सिर्फ वही लाल-पीला फल था। आकाश में सूर्य भगवान अपनी रथ पर बैठे थे, तभी उन्होंने देखा कि एक छोटा सा बालक उनकी ओर बढ़ रहा है। सूर्य देव मुस्कुराए और सोचा, "ये कौन सा वीर बालक है, जो मेरी तरफ इतने साहस से आ रहा है?" लेकिन इंद्रदेव को यह देखकर चिंता हुई। उन्होंने अपना वज्र उठाया और बाल हनुमान को रोकने के लिए आगे बढ़े। इंद्रदेव ने कहा, "रुको बालक! यह तुम्हारा खिलौना नहीं है। सूर्य देव को मत छेड़ो।" पर बाल हनुमान तो अपनी मस्ती में थे। वे ज़ोर से बोले, "मुझे भूख लगी है, और वह फल खाना है!" तभी वायु देवता वहाँ आए। उन्होंने इंद्रदेव को रोका और कहा, "हे देवराज, इस बालक पर क्रोध मत करो। यह तो मेरा पुत्र है, और मैं इसकी रक्षा करूँगा।" वायु देवता ने अपनी शक्ति से बाल हनुमान को सुरक्षित रखा। यह देखकर सभी देवता प्रसन्न हुए। ब्रह्मा जी ने वरदान दिया, "तुम अमर रहोगे।" इंद्रदेव ने भी आशीर्वाद दिया, "तुम्हारे शरीर को कोई शस्त्र नहीं काट सकेगा।" सूर्य देव ने कहा, "तुम्हें ज्ञान और विद्या मिलेगी।" सभी देवताओं के आशीर्वाद से बाल हनुमान और शक्तिशाली बने। माँ अंजनी ने आकर अपने बेटे को गले लगाया, और वायु देवता ने प्यार से कहा, "बेटा, अब घर चलें।" बाल हनुमान ने मुस्कुराते हुए सूर्य की ओर देखा और बोले, "अगली बार मैं ज़रूर खाऊँगा!" और सब हँस पड़े। उस दिन से बाल हनुमान की वीरता की कहानी पूरे संसार में फैल गई। रात हुई, तारे चमके, और बाल हनुमान अपनी माँ की गोद में सो गए।

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