
Yaman Ki Raat
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Lyrics
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आ… आ… आ…
हम्म… हाँ…
किस मोड़ पे आकर ठहरे हैं,
किस राह के हम मुसाफ़िर हैं…
ज़िंदगी बड़ी अजीब है,
कोई हिसाब रखती नहीं,
जो माँगा था कभी रब से,
वो चीज़ अब मिलती नहीं।
बचपन में जो ख़्वाब बुने थे,
उनसे ही अब भागते हैं,
जिन राहों पे जाना नहीं था,
उन राहों पे चल रहे हैं।
कभी ख़ुद से ये पूछा है,
कि आख़िर चाहते क्या हैं?
जिन चीज़ों में ख़ुशी ढूँढी,
उन्हीं से क्यों ख़फ़ा हैं?
हम अपने ही सपनों से,
नज़रें चुराने लगे हैं,
जो होना था अपनी मर्ज़ी से,
उससे घबराने लगे हैं।
जिस राह पे जाना नहीं था,
उसे मंज़िल बता रहे हैं,
क्या ख़ूब ज़िंदगी जी रहे हैं,
जो जीना नहीं चाहते हैं…
वो उम्र भी क्या उम्र थी,
जब ख़्वाब बे-हिसाब थे,
ना कल की कोई फ़िक्र थी,
ना आज के जवाब थे।
अब हर ख़ुशी से पहले हम,
सौ बार सोचते हैं,
जो दिल के सबसे क़रीब है,
उसी से दूर होते हैं।
कभी लगता है कि हम ही,
अपने रास्ते के क़ातिल हैं,
कभी लगता है कि हालात,
हमसे ज़्यादा साहिल हैं।
किससे कहें, क्या खो दिया,
क्या पा लिया, क्या छोड़ दिया…
जिन ख़्वाबों की ताबीर थे हम,
उन ख़्वाबों को ही तोड़ दिया…
हाय… ये कैसी बेबसी है,
कैसी ये दिल की बंदगी है…
जिस ज़िंदगी को चुनना था,
उसी से क्यों ख़ामोशी है…
हम अपने ही सपनों से,
नज़रें चुराने लगे हैं,
जो होना था अपनी मर्ज़ी से,
उससे घबराने लगे हैं।
जिस चीज़ से बचना था उम्र भर,
उसे सहारा बना लिया,
जो दिल कभी उड़ना चाहता था,
उसे पिंजरा बना लिया…
ज़िंदगी बड़ी अजीब है…
कुछ भी तो अपने हिसाब से नहीं…
और हम…
अपने ही ख़्वाबों में जीने से डरते हैं…