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VickyVicky
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Style: Traditional Indian Hanuman Chalisa devotional bhajan, powerful and soulful male lead vocals with clear Hindi and Awadhi pronunciation, deep spiritual expression and unwavering devotion. Traditional temple-style singing with harmonium, dholak, tabla, manjira, gentle temple bells and tanpura. Medium tempo around 90–95 BPM, rhythmic and melodious chanting, uplifting devotional chorus responding with “Jai Hanuman”. Powerful yet soothing vocal delivery, gradual musical build-up, authentic Indian bhajan atmosphere, divine and inspiring mood. Rich traditional Indian instrumentation, consistent rhythm throughout, clear vocals in the foreground, suitable for morning prayers and Hanuman devotion. No EDM, no pop, no rock, no heavy electronic beats.

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श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर ॥ रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी ॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा ॥ हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे। काँधे मुंज जनेऊ साजे ॥ संकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥ विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर ॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया ॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा ॥ भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे ॥ लाय सजीवन लखन जियाए । श्रीरगं हरषि उर लाए ॥ बड़े भाग रामहिं प्रिय भाई। उर बर्षि भन्दन कपीस गाई ॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥ सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥ जम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते । कवि कोविद कहि सकé कहाँ ते ॥ तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा । राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥ तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना । लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥ युग सहस्र योजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ॥ दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हारे तेते ॥ राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रक्षक काहू को डरना ॥ आपन तेज संहारो आपै । तीनों लोक हाँक ते काँपै ॥ भूत पिशाच निकट नहीं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ॥ नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥ संकट ते हनुमान छुड़ावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥ सब पर राम तपस्वी राजा । तिनके काज सकल तुम साजा ॥ और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै ॥ चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥ साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे ॥ अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस वर दीन जानकी माता ॥ राम रसायन तुमरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा ॥ तुमरे भजन राम को भावै। जन्म जन्म के दुख बिरावै ॥ अंतकाल रघुवर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई ॥ और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्व सुख करई ॥ संकट कटै मिटे सब पीरा। जो सुमिरे हनुमत बलबीरा ॥ जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥ जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदी महासुख होई ॥ जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥ पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥

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