Back to home
Untitled

Untitled

Dhwani SoodDhwani Sood
0 likes1 plays8:12
Style: male vocal

PRO & Creator Features

Unlock advanced AI features with Pro (Audio2Audio, Photo Covers, LoRA) or Creator (Voice Clone, Variations, Edit Sections, Stem Separation).

Audio2Audio Remix

Pro & Creator

Voice Clone

Creator

Create Variations

Creator only

Edit Sections

Creator only

Stem Separation

Creator only

॥ दोहा ॥ श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार । बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ॥ ॥ चौपाई ॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ १ ॥ रामदूत अतुलित बल धामा, अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥ २ ॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी ॥ ३ ॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुण्डल कुंचित केसा ॥ ४ ॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै, काँधे मूँज जनेउ साजै ॥ ५ ॥ शंकर सुवन केसरी नन्दन, तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥ ६ ॥ बिद्यावान गुनी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर ॥ ७ ॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया ॥ ८ ॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥ ९ ॥ भीम रूप धरि असुर सँहारे, रामचन्द्र के काज सँवारे ॥ १० ॥ लाय सजीवन लखन जियाये, श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥ ११ ॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥ १२ ॥ सहस बदन तुम्हरो जस गावैं, अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥ १३ ॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद सारद सहित अहीसा ॥ १४ ॥ जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते, कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥ १५ ॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा, राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥ १६ ॥ तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना, लंकेस्वर भये सब जग जाना ॥ १७ ॥ जुग सहस्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ १८ ॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं, जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥ १९ ॥ दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥ २० ॥ राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ २१ ॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डर ना ॥ २२ ॥ आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥ २३ ॥ भूत पिसाच निकट नहिं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै ॥ २४ ॥ नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥ २५ ॥ संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥ २६ ॥ सब पर राम तपस्वी राजा, तिन के काज सकल तुम साजा ॥ २७ ॥ और मनोरथ जो कोई लावै, सोइ अमित जीवन फल पावै ॥ २८ ॥ चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा ॥ २९ ॥ साधु सन्त के तुम रखवारे, असुर निकन्दन राम दुलारे ॥ ३० ॥ अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता ॥ ३१ ॥ राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा ॥ ३२ ॥ तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुख बिसरावै ॥ ३३ ॥ अन्त काल रघुबर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई ॥ ३४ ॥ और देवता चित्त न धरई, हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥ ३५ ॥ संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥ ३६ ॥ जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥ ३७ ॥ जो सत बार पाठ कर कोई, छूटहि बन्दि महासुख होई ॥ ३८ ॥ जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥ ३९ ॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥ ४० ॥ ॥ दोहा ॥ पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप । राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥

Comments(0)

Sign in to join the conversation.

No comments yet. Be the first to comment!