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Shadow Bass Echoes
Chill

Shadow Bass Echoes

Naresh BishnoiNaresh Bishnoi
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Style: male vocal, Heavy bass, bass, piano, aggressive, chill, guitar
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Lyrics

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तुमने तो बस हाथ छुड़ाया था,

यहाँ एक पूरी उम्र गुज़र गई।

जिस मोड़ पे छोड़ के देखा था,

वो पूरी गली ही मर गई।

मैं जी तो रही हूँ सांसों में,

पर रूह कहीं पर राख हुई...

हाँ राख हुई... मैं राख हुई...

तेरे इश्क़ में जलकर राख हुई...

हाँ राख हुई... मैं राख हुई...

एक ज़िंदा लाश की बात हुई...

(अंतरा एक / Verse एक)

(इस हिस्से में आवाज़ में ठहराव और दर्द होना चाहिए)

वो जो हँसने की एक आदत थी,

वो आदत भी अब रूठ गई।

कांच से भी नाज़ुक थी शायद,

जो तकदीर हमारी टूट गई।

अब आईने भी कतराते हैं,

मेरा अक्स मुझे दिखलाने से।

क्या गुज़री है इस पागल पर,

पूछो ना किसी दीवाने से।

जो ख़्वाब बुने थे आँखों ने,

वो आंसू बन के बह निकले।

हम जिसके लिए सब भूल गए,

वो हमसे आगे बढ़ निकले।

(अंतरा दो / Verse दो)

(यहाँ म्यूज़िक थोड़ा हैवी होगा और लिरिक्स का दर्द और गाढ़ा होगा)

तन्हाई का यह सन्नाटा,

अब चीख़ बदल कर आता है।

कमरे का एक-एक कोना बस,

तेरा ही नाम दुहराता है।

तू ख़ुश है अपनी दुनिया में,

मुझे बेमौत यहाँ मारकर।

क्या मिला तुझे ऐ बेदर्दी,

मुझ जैसी पाकीज़ा हारकर?

अब दवा भी असर नहीं करती,

और दुआ भी मेरी अधूरी है।

मंजिल तो मिली है गैरों को,

बस मेरी मौत ज़रूरी है।

(समाप्ति / Outro)

(बहुत धीमी आवाज़ में, जैसे आख़िरी सांस ले रहे हों)

अब कोई नहीं, कुछ शेष नहीं,

बस धुआँ-धुआँ सा मंज़र है...

मैं राख हुई... मैं राख हुई...

तेरे सीने में जो खंज़र है...

हाँ राख हुई...

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