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Style: Powerful Devotional, Hindu Bhajan, Traditional Indian, Deep Male Vocals, Powerful Male Chorus, Cinematic Orchestral, Indian Classical, Awadhi Chanting, Harmonium, Dholak, Pakhawaj, Tabla, Nagada, Manjira, Temple Bells, Conch Shell, Divine Atmosphere, Epic Build-Up, Grand Spiritual Finale, Clear Pronunciation, Reverent, Majestic

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जय हनुमान ज्ञान गुण सागर । जय कपीश तिहु लोक उजागर ॥ 1 ॥ रामदूत अतुलित बलधामा । अञ्जनि पुत्र पवनसुत नामा ॥ 2 ॥ महावीर विक्रम बजरङ्गी । कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥3 ॥ कञ्चन वरण विराज सुवेशा । कानन कुण्डल कुञ्चित केशा ॥ 4 ॥ हाथवज्र औ ध्वजा विराजै । [औरु] कान्थे मूञ्ज जनेवू साजै ॥ 5॥ शङ्कर सुवन केसरी नन्दन । [शङ्कर स्वयं] तेज प्रताप महाजग वन्दन ॥ 6 ॥ विद्यावान गुणी अति चातुर । राम काज करिवे को आतुर ॥ 7 ॥ प्रभु चरित्र सुनिवे को रसिया । रामलखन सीता मन बसिया ॥ 8॥ सूक्ष्म रूपधरि सियहि दिखावा । विकट रूपधरि लङ्क जलावा ॥ 9 ॥ भीम रूपधरि असुर संहारे । रामचन्द्र के काज संवारे ॥ 10 ॥ लाय सञ्जीवन लखन जियाये । श्री रघुवीर हरषि उरलाये ॥ 11 ॥ रघुपति कीन्ही बहुत बडायी (ई) । तुम मम प्रिय भरत सम भायी ॥ 12 ॥ सहस्र वदन तुम्हरो यशगावै । अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावै ॥ 13 ॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा । नारद शारद सहित अहीशा ॥ 14 ॥ यम कुबेर दिगपाल जहां ते । कवि कोविद कहि सके कहां ते ॥ 15 ॥ तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा । राम मिलाय राजपद दीन्हा ॥ 16 ॥ तुम्हरो मन्त्र विभीषण माना । लङ्केश्वर भये सब जग जाना ॥ 17 ॥ युग सहस्र योजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ 18 ॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही । जलधि लाङ्घि गये अचरज नाही ॥ 19 ॥ दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥ 20 ॥ राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ 21 ॥ सब सुख लहै तुम्हारी शरणा । तुम रक्षक काहू को डर ना ॥ 22 ॥ आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हाङ्क ते काम्पै ॥ 23 ॥ भूत पिशाच निकट नहि आवै । महवीर जब नाम सुनावै ॥ 24 ॥ नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरन्तर हनुमत वीरा ॥ 25 ॥ सङ्कट से हनुमान छुडावै । मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥ 26 ॥ सब पर राम तपस्वी राजा । तिनके काज सकल तुम साजा ॥ 27 ॥ और मनोरथ जो कोयि लावै । तासु अमित जीवन फल पावै ॥ 28 ॥ चारो युग प्रताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥ 29 ॥ साधु सन्त के तुम रखवारे । असुर निकन्दन राम दुलारे ॥ 30 ॥ अष्ठसिद्धि नव निधि के दाता । अस वर दीन्ह जानकी माता ॥ 31 ॥ राम रसायन तुम्हारे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥ 32 ॥ [साद रहो] तुम्हरे भजन रामको पावै । जन्म जन्म के दुख बिसरावै ॥ 33 ॥ अन्त काल रघुपति पुरजायी । [रघुवर] जहां जन्म हरिभक्त कहायी ॥ 34 ॥ और देवता चित्त न धरयी । हनुमत सेयि सर्व सुख करयी ॥ 35 ॥ सङ्कट क(ह)टै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बल वीरा ॥ 36 ॥ जै जै जै हनुमान गोसायी । कृपा करहु गुरुदेव की नायी ॥ 37 ॥ यह शत वार पाठ कर कोयी । [जो] छूटहि बन्दि महा सुख होयी ॥ 38 ॥ जो यह पडै हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीशा ॥ 39 ॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय मह डेरा ॥ 40 ॥

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