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مرحبا بأهل الوفاء
Spoken Word

مرحبا بأهل الوفاء

احمد المصرياحمد المصري
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Lyrics

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(हो...)

सिना की धरती पे आया सलाम

मरहबा उनको जो रखते हैं नाम

दिल से निकली ये दुआएँ

जो आए मेहमान हमारे

सीनों में जोश और जज़्बा

चेहरे पे रौनक़ सितारे

जो वादे किए थे पुराने

उन्हें हमने सीने से लगाया

रिवाज़ों की लाज़ रखी है

यही हमारी पहचान है भाई

मरहबा मरहबा लाखों बार

(मरहबा...)

सितारों की गिनती से भी ज़्यादा

रेत के कण जितने हैं

उतनी ही मुहब्बत हमारी

(हो... हो...)

मरहबा मरहबा लाखों बार

फ़नजाल में हमारी महक है

इलायची और कहवा प्यारा

आग जलती है ऊँचे पहाड़ों

मेहमान का दिल है हमारा

शेर जैसी हिम्मत रखते हैं

दुश्मन से कभी ना डरते

सच की राह पे चलते जाते

झूठे लोगों से ना घबराते

मरहबा मरहबा लाखों बार

(मरहबा...)

सितारों की गिनती से भी ज़्यादा

रेत के कण जितने हैं

उतनी ही मुहब्बत हमारी

(हो... हो...)

मरहबा मरहबा लाखों बार

शायरी सिर्फ़ लफ़्ज़ नहीं है

वज़न है और गहराई है

हर बात दिल से निकलती है

तभी तो सदियों तक रह पाती है

मरहबा मरहबा लाखों बार

(मरहबा...)

सितारों की गिनती से भी ज़्यादा

रेत के कण जितने हैं

उतनी ही मुहब्बत हमारी

(हो... हो...)

मरहबा मरहबा लाखों बार

(हो...)

सिना की धरती पे...

(मरहबा...)

(हो... हो... हो...)

ये प्यार रहेगा सदा...

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