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Maa Ki Mahima
Devotional

Maa Ki Mahima

Vivek SinghVivek Singh
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Style: Traditional Hindu Durga Chalisa, authentic North Indian temple bhajan, slow devotional rhythm at 82 BPM. Mature female lead vocal with clear Hindi and Sanskrit pronunciation, warm natural tone, expressive melodic singing and gentle devotional group responses. Traditional harmonium, tanpura drone, soft tabla, manjira and temple bells. Reverent, peaceful and spiritually powerful atmosphere, gradually building into a fuller devotional chorus. Keep vocals clearly in front of the instruments. Sing every supplied verse in order without skipping, inventing, translating or changing the lyrics. Natural phrasing, steady tempo, no rap, no EDM, no spoken introduction and no long instrumental breaks.
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Lyrics

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[Intro]

नमो नमो दुर्गे सुख करनी

नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी

[Verse 1]

निरंकार है ज्योति तुम्हारी

तिहूं लोक फैली उजियारी

शशि ललाट मुख महाविशाला

नेत्र लाल भ्रिकुटि विकराला

रूप मातु को अधिक सुहावे

दरश करत जन अति सुख पावे

तुम संसार शक्ति लै कीना

पालन हेतु अन्न धन दीना

[Chorus]

नमो नमो दुर्गे सुख करनी

नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी

[Verse 2]

अन्नपूर्णा हुई जग पाला

तुम ही आदि सुन्दरी बाला

प्रलयकाल सब नाशन हारी

तुम गौरी शिवशंकर प्यारी

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें

ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें

रूप सरस्वती को तुम धारा

दे सुबुद्धि रिषि मुनिन उबारा

[Verse 3]

धरयो रूप नरसिंह को अम्बा

परगट भई फाड़कर खम्बा

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो

हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो

लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं

श्री नारायण अंग समाहीं

क्षीरसिन्धु में करत विलासा

दयासिन्धु दीजै मन आसा

[Chorus]

नमो नमो दुर्गे सुख करनी

नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी

[Verse 4]

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी

महिमा अमित न जात बखानी

मातंगी अरु धूमावति माता

भुवनेश्वरी बगला सुख दाता

श्री भैरव तारा जग तारिणी

छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी

केहरि वाहन सोह भवानी

लांगुर वीर चलत अगवानी

[Verse 5]

कर में खप्पर खड्ग विराजै

जाको देख काल डर भाजै

सोहै अस्त्र और त्रिशूला

जाते उठत शत्रु हिय शूला

नगरकोट में तुम्हीं विराजत

तिहुंलोक में डंका बाजत

शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे

रक्तबीज शंखन संहारे

[Verse 6]

महिषासुर न्रिप अति अभिमानी

जेहि अघ भार मही अकुलानी

रूप कराल कालिका धारा

सेन सहित तुम तिहि संहारा

परी गाढ़ संतन पर जब जब

भई सहाय मातु तुम तब तब

अमरपुरी अरु बासव लोका

तब महिमा सब रहें अशोका

[Chorus]

नमो नमो दुर्गे सुख करनी

नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी

[Verse 7]

ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी

तुम्हें सदा पूजें नर-नारी

प्रेम भक्ति से जो यश गावें

दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें

ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई

जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी

योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी

[Verse 8]

शंकर आचारज तप कीनो

काम अरु क्रोध जीति सब लीनो

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को

काहु काल नहिं सुमिरो तुमको

शक्ति रूप का मरम न पायो

शक्ति गई तब मन पछितायो

शरणागत हुई कीर्ति बखानी

जय जय जय जगदम्ब भवानी

[Verse 9]

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा

दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा

मोको मातु कष्ट अति घेरो

तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो

आशा त्रिष्णा निपट सतावें

रिपू मुरख मौही डरपावे

शत्रु नाश कीजै महारानी

सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी

[Verse 10]

करो क्रिपा हे मातु दयाला

रिद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला

जब लगि जिऊं दया फल पाऊं

तुम्हरो यश मैं

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