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prem kumarprem kumar
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Style: Traditional Hindu devotional bhajan dedicated to Lord Hanuman. Deep, soulful Indian male vocals with clear Hindi and Awadhi pronunciation, meditative opening, powerful devotional singing, warm harmonium, gentle tabla, dholak, tanpura drone, manjira and temple bells. Peaceful temple ambience, spiritual and uplifting atmosphere, steady traditional bhajan rhythm, melodic chanting, subtle group responses, natural vocal expression and warm studio reverb. Begin slowly and build into an energetic yet reverent devotional performance. End with a soft, peaceful prayerful finish. Authentic Indian devotional sound, no pop, no rap, no EDM.

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श्री हनुमान चालीसा का संपूर्ण पाठ यहाँ दिया गया है: [Verse] श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ॥ [Verse] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी ॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा ॥ हाथ बज़्र अरु ध्वजा बिराजे। काँधे मुँज जनेऊ साजे ॥ संकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन ॥ विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर ॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया ॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा ॥ भीम रूप धरि असुर संहार्रे। रामचंद्र के काज सँवारे ॥ लाय सजीवन लखन जियाये। श्री रघुवीर हरषि उर लाये ॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥ सहस बदन तुम्हरो यस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥ सनकादिक ब्रह्माE मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा ॥ जम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते। कवि कोविद कहि सके कहाँ ते ॥ तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥ तुम्हरो मन्त्र विभीषण माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥ युग सहस्र योजन पर भानू। लिल्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ॥ दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥ राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ सब सुख लह तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डर ना ॥ आपन तेज संहारो आपै, तीनों लोक हाँक ते काँपै ॥ भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै ॥ नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥ संकट ते हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥ सब पर राम तपस्वी राजा, त틴 के काज सकल तुम साजा ॥ और मनोरथ जो कोई लावै, सोइ अमित जीवन फल पावै ॥ चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा ॥ साधु संत के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे ॥ अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस वर दीन जानकी माता ॥ राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा ॥ तुह्मरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुख बिसरावै ॥ अंत काल रघुबर पुर जाई, जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥ और देवता चित्त न धरई, हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥ संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥ जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥ जो सत बार पाठ कर कोई, छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥ जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥ [Verse] तुलसीदास सदा हर चेरा, कीजिए नाथ हृदय मँ डेरा ॥ पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥

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