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ALOK VERMAALOK VERMA
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Style: R&B-Bright 118 BPM Motown bounce, live brass stabs, tambourine ride, walking bass, girl-group answers, sweet tenored lead, hand-clap breaks, strings sneak-in.

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Lyrics

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श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।

बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।

बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥

राम दूत अतुलित बल धामा।

अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी।

कुमति निवार सुमति के संगी ॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा।

कानन कुण्डल कुँचित केसा ॥

हाथ बज़्र अरु ध्वजा बिराजे।

काँधे मुँज जनेऊ साजे ॥

संकर सुवन केसरी नंदन।

तेज प्रताप महा जग वंदन ॥

विद्यावान गुनी अति चातुर।

राम काज करिबे को आतुर ॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।

राम लखन सीता मन बसिया ॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।

विकट रूप धरि लंक जरावा ॥

भीम रूप धरि असुर संहार्रे।

रामचंद्र के काज सँवारे ॥

लाय सजीवन लखन जियाये।

श्री रघुवीर हरषि उर लाये ॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥

सहस बदन तुम्हरो यस गावैं।

अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥

सनकादिक ब्रह्माE मुनीसा।

नारद सारद सहित अहीसा ॥

जम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते।

कवि कोविद कहि सके कहाँ ते ॥

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा।

राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥

तुम्हरो मन्त्र विभीषण माना।

लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥

युग सहस्र योजन पर भानू।

लिल्यो ताहि मधुर फल जानू ॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।

जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ॥

दुर्गम काज जगत के जेते।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥

राम दुआरे तुम रखवारे,

होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥

सब सुख लह तुम्हारी सरना,

तुम रक्षक काहू को डर ना ॥

आपन तेज संहारो आपै,

तीनों लोक हाँक ते काँपै ॥

भूत पिशाच निकट नहिं आवै,

महाबीर जब नाम सुनावै ॥

नासै रोग हरै सब पीरा,

जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥

संकट ते हनुमान छुड़ावै,

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥

सब पर राम तपस्वी राजा,

त틴 के काज सकल तुम साजा ॥

और मनोरथ जो कोई लावै,

सोइ अमित जीवन फल पावै ॥

चारों जुग परताप तुम्हारा,

है परसिद्ध जगत उजियारा ॥

साधु संत के तुम रखवारे,

असुर निकंदन राम दुलारे ॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता,

अस वर दीन जानकी माता ॥

राम रसायन तुम्हरे पासा,

सदा रहो रघुपति के दासा ॥

तुह्मरे भजन राम को पावै,

जनम जनम के दुख बिसरावै ॥

अंत काल रघुबर पुर जाई,

जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥

और देवता चित्त न धरई,

हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥

संकट कटै मिटै सब पीरा,

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं,

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥

जो सत बार पाठ कर कोई,

छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा,

होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥

तुलसीदास सदा हर चेरा,

कीजिए नाथ हृदय मँ डेरा ॥

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥

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