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Thunderous Pulse Of War
Electronic

Thunderous Pulse Of War

Vipin KumarVipin Kumar
0 likes1 plays5:13
Style: aggressive, duet, Heavy bass, Upbeat, Energetic, drums, uplifting, epic
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Lyrics

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[Chorus]

ना सिंहासन की चाह मुझे, ना स्वर्गों का अभिमान!

मेरे कान्हा की आँखों में, जलता पूरा आसमान!

जिस दिन उसने भौंह चढ़ाई, काँप उठा ब्रह्मांड!

नाम नहीं वो केवल क्रिष्ण — वो कालों का महाकाल!

हरि बोल! हरि बोल!

आज गूँजेगा तीनों लोक!

हरि बोल! हरि बोल!

कान्हा खोलेगा काल का द्वार!

जिसके रथ पर बैठा माधव, उसका क्या बिगाड़े संसार!

[Verse 1]

ना धनुष की टंकार से डरता, ना तलवारों की धार!

मेरे क्रिष्ण की मौन द्रिष्टि ही, कर देती संहार!

एक तरफ़ हो लाखों योद्धा, एक तरफ़ घनश्याम!

धर्म जहाँ पर खड़ा हुआ है, वहीं खड़ा भगवान!

ना छल से वो हारता है, ना शक्ति से झुकता है!

जब-जब पाप शिखर पर चढ़ता, क्रिष्ण प्रलय बनता है!

वो मुरली वाला चाहे तो, स्रिष्टि नया रचाए!

वो चक्रधारी चाहे तो, युग का अंत कराए!

[Chorus]

(ढोल की चोट, शंखनाद, भारी पुरुष स्वर)

कौन है मालिक?!

गोविंद! गोविंद!

किसका है ये काल?!

गोविंद! गोविंद!

किसके आगे झुके अहंकार?!

गोविंद! गोविंद!

किसके हाथ में स्रिष्टि की डोर?!

मेरे क्रिष्ण का! मेरे क्रिष्ण का!

जय कन्हैया लाल की!

जय चक्रधारी की!

जय रणभूमि के सारथी की!

जय देवकी के लाल की!

[Verse 2]

जब तक सहता है माधव, उसको कमज़ोर न जान!

उसकी चुप्पी में छिपा हुआ है, युग बदलने का विधान!

जिसने द्रौपदी को ललकारा, उसका गर्व मिटाया!

जिसने धर्म को दाँव लगाया, उसको पाठ पढ़ाया!

वो प्रेम करे तो राधा बनकर, प्राणों में बस जाता है!

वो धर्म बचाने निकले तो, महाकाल कहलाता है!

ना उसका कोई अंत लिखा है, ना उसकी सीमा कोई!

क्रिष्ण जहाँ संकल्प कर लें, असंभव रहता नहीं कोई!

[Bridge]

(संगीत अचानक बंद। धीमी, गहरी आवाज़।)

अर्जुन ने जब पूछा माधव...

“ये जग सारा किसमें समाया?”

तब मुस्काकर श्याम ने अपना...

विराट स्वरूप दिखाया!

सूरज उसकी आँखों में थे...

चंद्रमा उसका भाल!

काल उसी की साँसों में था...

और चरणों में तीनों काल!

ना आदि उसका... ना अंत उसका...

ना कोई सीमा, ना दीवार!

जिसको जगत समझ न पाया...

वही क्रिष्ण है, वही आधार!

अंतिम क्लाइमैक्स — महायुद्ध का ऐलान

(तेज़ नगाड़े, भारी कोरस, शंखनाद)

उठ रे अधर्म! अब समय हुआ है!

धर्म का ध्वज लहराएगा!

जिसने सत्य को कैद किया है,

काल उसे समझाएगा!

ना मैं केवल प्रेम की मुरली!

ना मैं केवल रास!

मैं ही गीता, मैं ही चेतना,

मैं ही अंतिम श्वास!

जब-जब धरती चीख उठेगी,

जब-जब टूटेगा इंसाफ़!

धर्म की रक्षा करने फिर से,

गूँजेगा मेरा श्याम!

बोलो क्रिष्ण कन्हैया लाल की — जय!

सुदर्शन चक्रधारी की — जय!

धर्म के रक्षक की — जय!

जय श्री क्रिष्ण! जय श्री क्रिष्ण! जय श्री क्रिष्ण!

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