Back to home
Whispers Of Love
Acoustic

Whispers Of Love

Ismahami Isma ha amiIsmahami Isma ha ami
0 likes1 plays4:38
Style: Soulful vocals, female vocal, male vocal, guitar, romantic
Learn to sing thisKaraoke with live pitch — get a score on every lineSing →

PRO & Creator Features

Unlock advanced AI features with Pro (Audio2Audio, Photo Covers, LoRA) or Creator (Voice Clone, Variations, Edit Sections, Stem Separation).

Audio2Audio Remix

Pro & Creator

Voice Clone

Creator

Create Variations

Creator only

Edit Sections

Creator only

Stem Separation

Creator only

Lyrics

▶ Play this song to follow along.

[Intro]

अफ़्रिध…

एक लड़की थी, जिसकी नज़रें हर सुबह एक दरवाज़े पर रुक जाती थी… उसे खुद भी नहीं पता था कि वो किसी का इंतज़ार करने लगी है…

नौवीं की वो छोटी सी कक्षा, एक अंजाना सा नाम, एक दोस्ती का बहाना… फिर कुछ गुलाब की पंखुड़ियाँ, किताबों में छुपे हाथ, और देखते ही देखते… तुम बन गए मेरी पूरी कहानी।

सात साल बीत गए, अफ़्रिध… बचपन की वो मोहब्बत आज भी मेरे दिल में उतनी ही नई है। और अगर तुम कभी मुझसे पूछो कि मेरी दुनिया क्या है… तो मेरा जवाब आज भी सिर्फ तुम हो।

[Intro]

पहले दिन से कुछ तो था, जो लफ़्ज़ों में कह न पाई… दूसरे दिन तुम्हारा नाम पूछा, पर खुद को खबर न आई…

इलेक्शन के उस बहाने से, जब तुमने मुझसे बात की थी… एक छोटे से उस पल में जाने, कैसी शुरुआत हुई थी…

तुमने कहा था, “Deer” नाम रखो, आज भी वो पल याद है… दोस्ती के उस पहले पन्ने पर, लिखी मोहब्बत की बात है…

[VERSE 1]

सुबह-सुबह जब स्कूल में आती, दरवाज़े को देखा करती थी… तुम आए या आज नहीं आए, बस यही सोचा करती थी…

सारे चेहरे आस-पास थे, पर तुमसे बात खास थी… तुमसे बातें करती रहती, जैसे वक़्त को भी न जल्दी थी…

लंच में जब सब साथ बैठते, तुम अलग ही आ जाते थे… सिर्फ मेरे संग कुछ पल बिताने, अपनी जगह बनाते थे…

“चूवी, कुल्ली, Makeup रानी,” कहकर मुझको छेड़ा करते… मैं नाराज़ होने का नाटक करती, और तुम हँस दिया करते…

[PRE]

गुलाब की पंखुड़ियाँ जब, तुमने मुझ पर बरसाई थी… दोस्ती कहकर टाल दिया था, पर दुनिया जादू सी लगती थी…

तुम्हारी आँखों में कुछ था, जो मैं पढ़ नहीं पाती थी… सबसे बात कर सकती थी मैं, पर तुमसे बात कभी थकती नहीं थी…

[Chorus]

मेरा घर तुम हो, अफ़्रिध… मेरी हर दुआ तुम हो… मैं जहाँ भी रहूँ दुनिया में, मेरी दुनिया तुम हो…

सात जन्मों की बात नहीं बस, हर दिन तुम्हें चाहूँ… आज भी, कल भी, आख़िरी साँस तक, मैं तुम्हारी ही कहलाऊँ…

मेरा घर तुम हो, अफ़्रिध… मेरा सुकून तुम हो… सारी दुनिया छूट भी जाए, मेरा अपना बस तुम हो…

[VERSE 2]

उस दिन तुमने घर बुलाया, एक फंक्शन की वो शाम… पास बैठे, पैर जो छू गए, दिल ने लिया तुम्हारा नाम…

जब तुमने चेहरा छुआ मेरा, पल भर को दुनिया थम गई… वो पहली सी शराहत दिल में, एक मीठी सी धड़कन बन गई…

फिर मैंने ही तुमसे कह डाला, दिल में जो अरमान था… तुमने जब मेरा हाथ थामा, जैसे मिल गया जहाँ था…

किताबों के बीच छुपे हाथ, वो छोटी-छोटी सी मुलाक़ातें… मेरे पाउच में छुपे चॉकलेट्स, और तुम्हारी मीठी सौगातें…

ना बिके थी, ना कोई बहाना, बस मुझसे मिलने आते थे… पंद्रह साल की उम्र में भी, मुझ पर इतना प्यार लुटाते थे…

रोज़े में भी पैदल चल कर, मेरे घ

Comments(0)

Sign in to join the conversation.

No comments yet. Be the first to comment!