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Whispers Of Moonlight
Acoustic

Whispers Of Moonlight

Praveen SharmaPraveen Sharma
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Style: piano, Soulful vocals, Acoustic, Melodic, male vocal, soft vocals, flute, violin, happy, sad, romantic
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Lyrics

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(सूफ़ी-प्रोग्रेसिव | हार्टफेल्ट & टेंडर)

[Intro]

तेरे जल्वों का समुंदर छलका,

मैं किनारे पर देखता रहा

हर बूँद में तेरा चेहरा मिला,

हर लहर में खुद को भूल गया

फिर भी ए दिल, तू कहाँ है?

कहाँ है…

[Verse 1]

ये दास्ताँ पुरानी है, मगर रूह नई है

हर सुबह यही सदा, तेरी गली में दुआ है

साँसों में गूँजता है एक राज़—

तेरी याद का हर लम्हा इबादत का सुरूर है

जब जिस्म के दरवाज़े पे कोई दस्तक देता है

एक आवाज़ कहती है—

"अभी कुछ पीछे मुड़कर देख…"

[Chorus]

कुछ अंदर बाकी है,

कुछ अंदर बाकी है…

हर मंज़िल के बाद भी,

एक गुमनाम राह बाकी है

कुछ अंदर बाकी है।

[Verse 2]

जो मिल गया — वो पल, वो सच, वो नूर

अधूरा-सा लगता है बिना तेरे ज़ौक़ के

जलता हूँ मैं शमा की तरह,

और सवेरा है उबलता हुआ

पर हर लौ में छिपी है एक और शाम

हर रंग के पार एक मंज़र है—

जहाँ मैं नहीं, सिर्फ़ तू है

और एक खाली घड़ा-सा दिल है

भरा भी हुआ, प्यासा भी…

[Chorus]

कुछ अंदर बाकी है,

कुछ अंदर बाकी है…

हर मंज़िल के बाद भी,

एक गुमनाम राह बाकी है

कुछ अंदर बाकी है।

[Bridge]

ऐ साक़ी! इश्क़ का दौर चला है

छलका है, गिरा है

फिर भी जाम के गहरे में कुछ शेष है

हर सुबह की तरह, हर रात के बाद

"कुछ अंदर बाकी है" —

यही कहती है सारी किताबें,

यही कहते हैं दरवेश

कि हमारा दामन खाली नहीं

बे-नशीब नहीं

उसमें एक दरिया का अंश है

जो सागर में जा मिला है

फिर भी घाट पर झुककर लहरें पूछती हैं—

"अभी तो कुछ अंदर बाकी है…"

[Outro]

जब दिन ढलें, जब नींद टूटे

जब रूह उड़े, तो रास्ते बदले

हर ज़र्रे पे नक़्श है तेरे हाथ का

हर दिल में आह है

कुछ अंदर बाकी है…

अभी अभी…

कुछ अंदर बाकी है…

कुछ अंदर…

बाकी है।

(अंत: इलेक्ट्रिक सितार की एक लहर, तानपूरे की गूँज, और एक साँस जो पूरी न हो — अभी और है।)

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