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Aishi AsatiAishi Asati
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Style: Soulful vocals, male vocal, flute, peaceful

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प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ।। दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ।। राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रच्छक काहू को डर ना ।। आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हांक तें कांपै ।। भूत पिसाच निकट नहिं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ।। नासै रोग हरे सब पीरा । जपत निरन्तर हनुमत बीरा ।। संकट तें हनुमान छुड़ावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ।। सब पर राम तपस्वी राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ।। और मनोरथ जो कोई लावै । सोई अमित जीवन फल पावै ।। चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ।। साधु संत के तुम रखवारे । असुर निकन्दन राम दुलारे ।। अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ।। राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ।। तुह्मरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ।। अंत काल रघुबर पुर जाई । जहां जन्म हरिभक्त कहाई ।। और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ।। संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ।। जय जय जय हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ।। जो सत बार पाठ कर कोई । छूटहि बन्दि महासुख होई || जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ।। तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय महं डेरा ।। पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप । राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ।।

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