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Echoes Of The Soul
Acoustic

Echoes Of The Soul

Jiya TrivediJiya Trivedi
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Style: Orchestral, Soulful vocals, Ambient pads, Acoustic, choir, duet
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Lyrics

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दो साल से जागे हैं, कितनी ही रातें,

तेरी आवाज़ में गुज़री मेरी सौ बातें,

तू पास हो तो लम्हा भी थमता नहीं,

तू दूर हो तो दिन भी गुज़रता नहीं।

[Verse 1]

तेरी आँखों में कैसा सुकून रहता है,

दिल मेरा वहीं जाने क्यों रहता है,

तू हँसती है तो दिल करता है,

बस देखता रहूँ, ये दिल कहता है।

तेरी हँसी पे कुछ यूँ फ़िदा हूँ,

तुझे छेड़ने का बहाना ढूँढूँ,

तू रूठ भी जाए तो क्या ग़म है,

तुझे मनाने में भी अपना मज़ा है।

तेरे चेहरे पे ठहरी सी शाम है,

तुझे देखूँ तो दिल को आराम है,

मैं लफ़्ज़ों में कह भी दूँ जो कभी,

वो इश्क़ मेरा लफ़्ज़ों से परे ही सही।

[Poorv]

वो रात, वो रंग, वो तेरा नूर,

तू सामने थी, जहाँ था दूर,

तुझे पहली दफ़ा उस लिबास में देखा,

दिल ने उस पल तुझे फिर से था चाहा।

कुछ कह न सका, बस देखता रहा,

तू पास थी और वक़्त बहता रहा।

[Chorus]

तेरे बाद भी, तू ही तू है,

मेरी हर ख़ुशी में तेरी जुस्तजू है,

ये चाँद भी अब अधूरा लगे,

तेरे बिन हर मंज़र तन्हा लगे।

तू मिलके भी दिल में रहती है,

हर साँस तेरा नाम कहती है,

मैं लौट तो आया हूँ यहाँ,

मेरा दिल मगर है तेरे वहाँ।

[Chorus 1]

तूuuuuu हीiiiiiiiii...

तूuuuuu हीiiiiiiiii...

मेरी रातों की चाँदनी...

तूuuuuu हीiiiiiiiii...

मेरी रूह की राह भी...

तूuuuuu हीiiiiiiiii...

(पीछे हल्की आवाज़: तू ही... तू ही...)

[Verse 2]

वो घूमती रात, वो तेरा हाथ,

वो गीतों में छुपी दिल की बात,

सब नाच रहे थे, सब झूम रहे थे,

हम एक दूजे में कहीं खो रहे थे।

तू दूर से देखे, मैं मुस्कुरा दूँ,

तू नज़र मिलाए, मैं नज़र चुरा लूँ,

फिर तेरी नज़र जब मुझपे रुकी,

मुझे याद नहीं फिर दुनिया थी क्या।

तुझे हर धुन का हर बोल याद था,

तेरे लबों पे हर गीत बेमिसाल था,

मैं गीत कहाँ, तुझे सुन रहा था,

तू गा रही थी, मैं तुझमें खो रहा था।

[Madhya]

बस तू रहे, मैं रहूँ,

कुछ न कहूँ, तुझे सुनूँ,

ना कोई वजह, ना कोई सवाल,

बस यूँही गुज़रे हर एक रात।

तेरी बाहों में मिलता है घर,

तुझसे ही रोशन मेरी हर सहर।

[Chorus 2]

तूuuuuu हीiiiiiiiii...

जिसे देखूँ, वो तू ही...

जिसे सोचूँ, वो तू ही...

मेरी ख़ामोशी में तू ही...

मेरी हर धुन में तू ही...

तूuuuuu हीiiiiiiiii...

(पीछे से गूँज: बस तू ही... बस तू ही...)

[Verse 3]

वो साथ में खाना, वो हाथ में हाथ,

वो देर तलक चलती दिल की बात,

वो बीच बात के चुप हो जाना,

फिर आँखों से सब कह जाना।

तेरे सर को सीने से लगा के,

वो वक़्त को धीरे से भुला के,

मैं सोचता था, सुबह न हो,

ये रात कभी जुदा न हो।

तेरे साथ घड़ी का होश न था,

किसी और ख़्वाहिश की तलाश न थी,

अब हर घड़ी को देखा करूँ,

कब तू मिलेगी, यही सोचा करूँ।

[Lay mein badlaav — gehri dhun, dabi hui

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