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Threads of Two Winds
Acoustic

Threads of Two Winds

vedha krishnavedha krishna
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Style: Melodic, Soulful vocals, duet, guitar, flute
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Lyrics

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[Verse 1]

तुम सामने थी, कुछ कहा भी नहीं,

फिर भी जाने क्या सुन लिया मैंने,

तुम अपनी बातों में मसरूफ रही,

और वक्त को धीरे होते देखा मैंने।

तुम हंसती हो तो लगता है यूं,

जैसे सब कुछ अपनी जगह है,

तुम में ऐसा क्या है, मुझे क्या पता,

बस तुम में दिल को पनाह है।

[Pre]

और तुम्हें देख कर,

ये ख्याल आता है,

कोई इतना सादा होकर,

कैसे इतना हसीन नज़र आता है?

[Chorus]

कुछ यूं तुम मेरी नज़र में हो,

जैसे लफ़्ज़ किसी ग़ज़ल में हो,

तुम्हें लिखूं तो लिखूं भी क्या,

तुम उस बात में हो जो बयां न हो।

कुछ यूं तुम मेरे करीब हो,

जैसे ख्वाब कोई ताबीर हो,

मैं तुमको पाने की बात न करूं,

बस तुम जहां हो, वहीं सुकून हो।

[Verse 2]

तुम्हारी सोच में एक नरमी सी है,

मगर अपने उसूलों में पक्की हो,

तुम सबकी सुन कर भी आखिर में,

अपने दिल की ही सुनती हो।

तुम्हारी आंखों में देखा है मैंने,

वो सब जो तुम कहती नहीं,

एक पूरी दुनिया रहती है तुम में,

जो हर किसी को दिखती नहीं।

तुम हुस्न हो, ये कहना आसान है,

पर तुम बस हुस्न से बढ़कर हो,

तुम जिस तरह से दुनिया को देखो,

उस नज़रिये से भी बेहतर हो।

[Chorus]

कुछ यूं तुम मेरी नज़र में हो,

जैसे लफ़्ज़ किसी ग़ज़ल में हो,

तुम्हें लिखूं तो लिखूं भी क्या,

तुम उस बात में हो जो बयां न हो।

कुछ यूं तुम मेरे करीब हो,

जैसे ख्वाब कोई ताबीर हो,

मैं तुमको पाने की बात न करूं,

बस तुम जहां हो, वहीं सुकून हो।

[Bridge]

कभी तुम खुद को कम समझने लगो,

तो मेरी नज़र से खुद को देखना,

तुम्हें अपनी खूबियां गिनवाऊं नहीं,

बस तुम जो हो, उस पर यकीन रखना।

मैं तुम्हारी राह नहीं चुनूंगा,

ना तुम्हें अपने रंग में ढालूंगा,

तुम जिस तरफ भी जाना चाहो,

मैं तुम्हारी खुशी की दुआ करूंगा।

[Outro]

कुछ बातें कहने से कम होती हैं,

कुछ नज़रें सब कह जाती हैं,

तुम मेरी ज़िंदगी का हिस्सा बनो या न बनो,

कुछ लोग रूह में रह जाते हैं।

और तुम...

शायद उन्हीं में से हो।

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