
Devbhoomi Chhath Arghya
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Lyrics
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[Intro]
जय हो छठी मईया!
जय हो दीनानाथ!
देवभूमि उत्तराखंड से,
गूँजे माई के जयकार!
हिमालय के छाँव में,
तराई के पावन घाट,
छठी मईया के महिमा गावे,
आज पूरा उत्तराखंड!
[Chorus]
देवभूमि में होला छठ पूजा,
गूँजे जय-जयकार हो,
उत्तराखंड के धरती पे,
माई के दरबार हो।
पहाड़न से लेके तराई तक,
भक्ति के बहार हो,
छठी मईया के किरपा से,
खुशहाल संसार हो॥
छठी मईया के घंटिया,
स्वर्ग से सुन्दर लागेला,
देवभूमि में छठ के पर्ववा,
मनवा भाव से जागेला॥
[Verse 1]
हिमालय के ऊँच चोटी,
देखे अंबर मुस्काए,
गंगा मैया के पावन धारा,
मन के मैल बहाए।
देवभूमि के कण-कण में,
भक्ति के रंग समाइल,
छठी मईया के नाम से,
हर घर दीप जराइल।
कहीं पहाड़ के ठंडी हवा,
कहीं तराई के बहार,
माई के पूजा करे खातिर,
सज गइल सगरी संसार।
पूरब के नेह, पहाड़ के प्यार,
मिलके करे पुकार,
जय-जय छठी मईया गूँजे,
गूँजे जय-जयकार॥
[Chorus]
देवभूमि में होला छठ पूजा,
गूँजे जय-जयकार हो,
उत्तराखंड के धरती पे,
माई के दरबार हो।
पहाड़न से लेके तराई तक,
भक्ति के बहार हो,
छठी मईया के किरपा से,
खुशहाल संसार हो॥
छठी मईया के घंटिया,
स्वर्ग से सुन्दर लागेला,
देवभूमि में छठ के पर्ववा,
मनवा भाव से जागेला॥
[Verse 2]
हल्द्वानी से रुद्रपुर तक,
छठ के रंग निराला,
काशीपुर अउर सितारगंज में,
सज गइल घाट मतवाला।
शक्तिफार्म के गलियन में,
गूँजे छठी मईया के गीत,
दउरा माथे, मन में श्रद्धा,
चेहरा पर मुस्कान पुनीत।
देहरादून से तराई तक,
दीपक जगमग होई,
छठी मईया के दरबार में,
सबके अरजी सुनाई।
कहीं ढोलक, कहीं मँजीरा,
कहीं शंख के नाद,
देवभूमि में छठ मनावे,
उमड़ल भक्तन के सैलाब॥
[Chorus]
देवभूमि में होला छठ पूजा,
गूँजे जय-जयकार हो,
उत्तराखंड के धरती पे,
माई के दरबार हो।
पहाड़न से लेके तराई तक,
भक्ति के बहार हो,
छठी मईया के किरपा से,
खुशहाल संसार हो॥
छठी मईया के घंटिया,
स्वर्ग से सुन्दर लागेला,
देवभूमि में छठ के पर्ववा,
मनवा भाव से जागेला॥
[Verse 3]
नहाय-खाय के दिनवा अइले,
घर-अँगना लिपाला,
नेम-धरम के पावन रीतिया,
मन से सब अपनाला।
खरना के पावन साँझ भइल,
गुड़ के खीर बनल बा,
छठी मईया के प्रसाद से,
मनवा निर्मल भइल बा।
सूपवा में फल, ठेकुआ सजले,
नारियल शोभा पावे,
माई के पावन नाम जपेला,
घर-घर मंगल गावे।
कठिन व्रत के नेम निभाके,
माई से आस लगावे,
छठी मईया सबके सुनिहें,
भक्त पुकार सुनावे॥
[Chorus]
देवभूमि में होला छठ पूजा,
गूँजे जय-जयकार हो,
उत्तराखंड के धरती पे,
माई के दरबार हो।
पहाड़न से लेके तराई तक,
भक्ति के बहार हो,
छठी मईया के किरपा से,
खुशहाल संसार हो॥
छठी मईया के घंटिया,
स्वर्ग से सुन्दर लागेला,
देवभूमि में छठ के पर्ववा,
मनवा भाव से जागेला॥
[Verse 4]
साँझ भइल, दिन ढल जाए,
लाल भइल अंबरवा,
दउरा ल