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Neon Electric Pulse
Electronic

Neon Electric Pulse

Akash MishraAkash Mishra
0 likes1 plays3:30
Style: pop, synth, drums, guitar, 120 bpm, upbeat, catchy, vibrant, polished vocals, male vocal
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Lyrics

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Conversation with Gemini

add an manthan mordern art wallpaper to my song

I have generated your song with a modern "Manthan" art style theme. You can play and listen to the track directly in the chat!

ये हथियारों के ढेर वहीं से आते हैं , फिर लोगों को मार कर खुद को सरवग्य बताते हैं,

जिस दिन खड़े हो जाए साथ मे सब फिर,

उस दिन सुधर जाएंगे इनके बाप सारे सब फिर,

नई पुरानी बात का अम्बार लगाया जाता है,

करके भ्रस्टाचार फिर पापों छुपाया जाता है,

न हो खुद्दारी बाकी तो तुम अपना परिवार संभालो,

भारत हम पे छोड़ो, तुम अपना श्र्रिंगार संभालो,

जात पात का नाटक अपने पास रखो,

है इतना प्यारा देश तो ना बर्बाद रखो,

जितनी चाहे तेज चला लो गद्दारों आंधी फिर तुम,

हम फिर ऊँचा करके झंडा छाती पर लेहरायेंगे, सोचो मत चंद हवा के झोंकों से डर जाएंगे,

इस अजादी मे आज गुलामी जादा है,

अपने अपनो को लूट रहे, अंग्रेज़ों और इनमे फिर क्या बाँटा है,

हर गली हर कूचे मे दबंगो का बोल बाला है,

कुछ खादी के चक्कर मे खाकी का रंग भी काला है,

मत पूछो कितना लहू बाकी है हममें कितनी साँसे ज्यादा है,

आखीरी बूंद बाकी जब तक जंग लड़ेंगे तब तक, अभी तो खून ताज़ा है...... जय हिन्द?ll

ise ek rap song me badal do

यहाँ आपके शब्दों को एक दमदार और रिदमिक रैप सॉन्ग के रूप में ढाला गया है, जिसे आप अपने म्यूज़िकल स्टाइल के अनुसार गा सकते हैं:

[Intro]

हाँ... चेक इट!

सुनो, बात गहराई की है...

जय हिन्द!

(कोरस / हुक)

ये हथियारों के ढेर वहीं से आते हैं,

फिर अपनों को मार के खुद को सर्वग्य बताते हैं!

जिस दिन खड़े हो जाएं साथ में सब फिर,

उस दिन सुधर जाएंगे इनके बाप सारे सब फिर!

नई-पुरानी बात का अम्बार लगाया जाता है,

करके भ्रष्टाचार फिर पापों को छुपाया जाता है!

[Verse 1]

न हो खुद्दारी बाकी तो तुम अपना परिवार संभालो,

भारत हम पे छोड़ो, तुम अपना श्र्रिंगार संभालो!

जात-पात का नाटक अपने पास रखो,

है इतना प्यारा देश तो ना बर्बाद रखो!

जितनी चाहे तेज़ चला लो गद्दारों आंधी फिर तुम,

हम फिर ऊँचा करके झंडा छाती पर लहरायेंगे,

सोचो मत चंद हवा के झोंकों से डर जाएंगे!

[Verse 2]

इस आज़ादी में आज गुलामी ज़्यादा है,

अपने अपनों को लूट रहे, अंग्रेज़ों और इनमें फिर क्या बाँटा है?

हर गली हर कूचे में दबंगों का बोल-बाला है,

कुछ खादी के चक्कर में खाकी का रंग भी काला है!

मत पूछो कितना लहू बाकी है, हममें कितनी साँसे ज़्यादा हैं,

आख़िरी बूँद बाकी जब तक, जंग लड़ेंगे तब तक... अभी तो खून ताज़ा है!

[Outro]

हाँ भाई...

ना डरे हैं, ना डरेंगे!

ये मन्थन है...

जय हिन्द!

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