Back to home
Bajao Shor
Hip-Hop

Bajao Shor

Krishna AnjaliKrishna Anjali
0 likes1 plays3:23
Style: Heavy bass, rap, male vocal, drums, bass, brass, guitar, aggressive, Desi Hip-Hop | Political Satire | Heavy Bass
Learn to sing thisKaraoke with live pitch — get a score on every lineSing →

PRO & Creator Features

Unlock advanced AI features with Pro (Audio2Audio, Photo Covers, LoRA) or Creator (Voice Clone, Variations, Edit Sections, Stem Separation).

Audio2Audio Remix

Pro & Creator

Voice Clone

Creator

Create Variations

Creator only

Edit Sections

Creator only

Stem Separation

Creator only

Lyrics

▶ Play this song to follow along.

Turup Ka Ikka

[Intro]

Yo! Yo!

बिसात बिछी है, खिलाड़ी तैयार,

ताश के पत्तों में छिपा है सारा संसार!

एक तरफ़ बादशाह, एक तरफ़ गुलाम,

खेल सियासत का, जनता के नाम!

[Verse 1]

दुरी ने तिरी से कहा, चौके से हाथ मिला ले,

पंजा भी साथ खड़ा है, अपनी सरकार बना ले!

जब पंजा तेरे साथ, तो छक्का क्या उखाड़ेगा?

बिसात पे बैठा खिलाड़ी, कौन किसको पछाड़ेगा?

सत्ता छुट्टी पे बैठी, अट्ठा अपनी मुट्ठी में,

नहला पहले राज़ी, दहला खड़ा है रिश्तेदारी में!

गुलाम कहे आज़ाद हूँ, अपनी ही रफ़्तार में,

बेगम परेशान बैठी, चमचे लगे दरबार में!

[Chorus]

ये बाज़ी है बाज़ी, अभी खेल बाकी है,

हर चेहरे के पीछे एक कहानी बाक़ी है!

इक्का हो या बादशाह, सबकी अपनी बारी है,

जनता जब हिसाब करे, बदलती बाज़ी सारी है!

तुरुप का इक्का! — कौन रोक पाएगा?

जनता का फैसला — कौन झुठलाएगा?

बिसात नई होगी, नया दौर आएगा,

जोकर का ताज भी वक़्त उतरवाएगा!

[Verse 2]

किस मुग़ालते में बैठे, किस बात पे ऐंठे हैं?

जोकर को बादशाह बनाकर, खुद ही ताली पीटें हैं!

चेहरे पे मुखौटे, दिल में सौ सवाल,

कुर्सी की इस दौड़ में कौन सच्चा, कौन जाल?

हर पत्ते की कीमत है, हर चाल का हिसाब,

किसके कितने वादे थे, जनता रखती किताब!

नया पत्ता, नई चाल, नई बिसात सजानी है,

सत्ता कोई जागीर नहीं, जनता की अमानत पुरानी है!

[Bridge]

उधर से इक्के की आवाज़ आई,

भाइयों और बहनों, सुनो मेरी बात,

भारत से मेरा रिश्ता, दिल से जुड़ा है,

ये रिश्ता नहीं टूटेगा किसी के हाथ!

[FINAL DROP — HEAVY BASS ]

ये इक्का तुरुप का इक्का है,

हर चाल का जवाब पक्का है!

बिसात पे चाहे लाख खिलाड़ी,

जनता से बड़ी नहीं कोई सवारी!

ना ताज से डर, ना तख़्त से डर,

सच के साथ चल, फिर किस बात का डर?

खेल अभी बाकी, कहानी अभी बाकी,

जनता की अदालत में जवाबदेही बाकी!

[Outro]

Yo!

पत्ते बदलेंगे, दौर बदलेगा,

वक़्त के साथ हर शोर बदलेगा!

याद रखना ये बात, लिख लेना सीने पे,

बाज़ी वही जीतेगा जो खरा उतरेगा जनता की कसौटी पे!

Comments(0)

Sign in to join the conversation.

No comments yet. Be the first to comment!