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Raag Ki Rooh
Indian Classical

Raag Ki Rooh

D
Dhaval
0 likes1 plays6:34
Style: indian classical, tanpura, raaga, male vocal, Soulful vocals
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Lyrics

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जान्तस्वरूपां करुनामईंतां वानीच सत्यप्रददाशुभांगिम्

विवाद जालच्छि दुरास्मरामि

ओम्मस्य श्री विवादनि वारनन्स्तो त्रस्य

लेखरंजनरिश्य अनुष्टु च्छन्द

श्री विवाद निवारनी देवी देवता सर्वकल हशमनार्थे जपेवेनियोग

रिशादि नास ओमले खरंजन रिशये नम शिरसी अनुष्टुप छन्दसे नम मुखे

श्रीविवादनि वारनी देवतायई नमाहिदी

सर्वशान्ति प्रदायई नमसर्वागे

शान्ति दात्रईक निष्ठे का भ्यांडमा।

ओम सर्व विवाद निवारिन्याई कर तलकर प्रिष्ठा भ्यानमा।

अंगन्यास ओम्शान्ते रिगयाय नमा।

ओम बादनाशिन्याई शिरसेश्वहा।

ओम सान्टिदात्रै नेत्रत्रयाय वाउषट्त्त।

ओम सर्वविवाद निवारिन्याय अस्त्राय भट्त।

अर्गलस्तोत्रम् ओम विवाद रंग शमनंदेहिस्वाह्

व्म् प्रोडा जनीश्मनंदैस्वाह ओम् वनिदोष निवारनंदैस्वाह ओम् मिठ्च्छा लहनाशनंदैस्वाह ओम् सोव्हार्धास्थापनंदैस्वाह

ख्रोधान भकारं विमिवार शीग्रं मिठ्थ्या विवादं प्रशमं नयस्व सौःद भावं जनयस्व लोके शान्तिम् परांगे हिक्रिपावती त्वं।

यत्र विवादो भवती मनुष्यतत्रत्वदियन स्मरणन्शुभन्स्याद्वाणी मधुरान्गुरु सर्वदामेध्वेशन्चनाशंगुरुदेविशीग्रम्

फालशुरुति यपठेच्षधयानित्यम् विवाद कलुषन अश्यकितस्यां ग्रिहेशान्ति सौखन्च वर्धते सदा सत्यधर्म मार्गेश्थिति जायते ध्रुवं

प्रिप्ष्री विवादनि वारनस तोत्रम संपूर्णम

वाल शुरुती

यपठेच्षध्धायानित्यम् विवाद्गलुषं अश्यतितस्या ग्रिहेशान्ति सौखंच वर्धते सदा सत्यधर्ममाळ्गेस्थिति जायते दुवं

इतिश्री विवाद्गिवार्णस्तोत्रम् संपूर्णम्

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PAUSECALAVY

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