
Khud Se Milna
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Lyrics
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� फ़िज़ूल नहीं ये ज़िंदगी
एक ख़ुद से की गई गुफ़्तगू — दर्द, समझ और हौसले का गीत
[Chorus]
हर बात पे सोचना, ज़रूरी तो नहीं,
हर जंग में उलझना, ज़रूरी तो नहीं।
जो बीत गया, उसको जाने भी दे,
जो हाथ में है, उसे सँभालने भी दे।
अपनी ताक़त को यूँ बर्बाद मत कर,
जो गुज़र गया, उसका हिसाब मत कर।
ज़िंदगी आगे है, पीछे नहीं,
हर लड़ाई तेरे हिस्से की नहीं।
[Verse 1]
जब ख़ामोशी में ख़याल शोर करते हैं,
बीते हुए लम्हे फिर से घेरते हैं।
मैं ख़ुद को किसी मक़सद में मशग़ूल रखता हूँ,
हर फ़िज़ूल सोच से ख़ुद को दूर रखता हूँ।
क्यों सोचूँ मैं वो, जो बदल नहीं सकता?
क्यों ढोऊँ वो बोझ, जो सँभल नहीं सकता?
हर सवाल का जवाब मिले, ये ज़रूरी नहीं,
हर उलझन को सुलझाना भी ज़रूरी नहीं।
[Chorus]
हर बात पे सोचना, ज़रूरी तो नहीं,
हर जंग में उलझना, ज़रूरी तो नहीं।
जो बीत गया, उसको जाने भी दे,
जो हाथ में है, उसे सँभालने भी दे।
अपनी ताक़त को यूँ बर्बाद मत कर,
जो गुज़र गया, उसका हिसाब मत कर।
ज़िंदगी आगे है, पीछे नहीं,
हर लड़ाई तेरे हिस्से की नहीं।
[Verse 2]
क़दम-क़दम पे इंसान से ख़ता होती है,
कभी नज़र से, कभी फ़ैसलों से ख़ता होती है।
जो आज सही है, कल ग़लत भी लगेगा,
नया नज़रिया पुराने सच को बदलेगा।
अगर भूल हुई, तो सबक़ ले उससे,
न उलझा रह उम्र भर उसी क़िस्से में।
जो हो चुका, उसे बदल नहीं पाएगा,
मगर आने वाला कल तो सँवार पाएगा।
ग़लती को अपनी पहचान मत बना,
गुज़रे हुए कल को अपनी ज़ंजीर मत बना।
सीख, सँभल, और फिर आगे बढ़,
हर बार ख़ुद को कटघरे में खड़ा मत कर।
[Verse 3]
अगर कोई और कहीं ग़लत कर जाए,
तो क्या ज़रूरी है कि वो बुरा कहलाए?
उस पल उसे जो सही लगा, उसने किया,
शायद वक़्त ने बाद में उसे आईना दिया।
अगर समझ गया है, तो बदलने भी दे,
अपनी भूलों से कुछ सीखने भी दे।
मदद कर सके, तो उसका हाथ थाम ले,
नहीं तो ख़ामोश रह, उसे इल्ज़ाम मत दे।
हर ग़लती के पीछे बुरी नीयत नहीं,
हर हार के पीछे इंसान की शिकस्त नहीं।
जो ख़ुद को सुधारने की कोशिश में लगा है,
उसे गिरा मत, वो पहले ही ख़ुद से लड़ रहा है।
[Bridge]
ना हर बात का जवाब, ना हर जंग में जाना,
ना हर ज़ख़्म को दुनिया के सामने दिखाना।
जहाँ तेरी मौजूदगी कुछ बदल नहीं सकती,
वहाँ तेरी बेचैनी भी कुछ कर नहीं सकती।
अपनी फ़िक्र कर, अपने कल को सँवार,
हर बेकार लड़ाई में ख़ुद को मत हार।
कभी पीछे हटना भी समझदारी है,
हर जीत से बढ़कर मन की तैयारी है।
[Chorus]
हर बात पे सोचना, ज़रूरी तो नहीं,
हर जंग में उलझना, ज़रूरी तो नहीं।
जो बीत गया, उससे सीख ले ज़रा,
फिर आने वाल