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Sanskrit Serenity Chant
Ambient

Sanskrit Serenity Chant

P
Pawan
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Style: Vedic Sanskrit chanting, soft female voice, calm and graceful, steady uniform tempo around 120 BPM, flat recitation with minimal melody, soft tanpura drone only, no drums, no percussion, no instrumental solos, no key or tempo change, no backing vocals, clear pronunciation, devotional. [Chant, spoken-sung, uniform tempo, same pitch throughout] Sing every line exactly as written. Do not skip, repeat, rearrange, translate or add any words. No intro, no outro, no instrumental break, no chorus.
Learn to sing thisKaraoke with live pitch — get a score on every lineSing →

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Lyrics

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चन्द्रम हिरान्मयी लक्ष्मी जातवेदो म आवह ||

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम |

यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषान्ह्म ||

अश्वपुर्वाम रथमाध्यम हस्तिनदप्रबोधिनीम |

श्रियं देवीमुपहव्ये श्रीर्मादेव जुषताम ||

कांसोस्मितं हिरण्यप्रकारां आद्रं |

ज्वलन्ती त्रिप्तां तर्पयंतिम ||

पध्मेस्थितम पध्मवर्णं |

तामिहोपह्वायेश्रियं ||

चन्द्रां प्रभासम यशसा ज्वलंतिम

श्रियं लोके देव जुष्टामुदाराम |

तां पध्मिनीमीम शरणमहं

प्रपद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां व्रिणे ||

आदित्यवर्णे तपसोअधिजातो

वनस्पतिस्तवव्रिक्षोथ बिल्वः |

तस्य फलानी तपसानुदंतु

मायान्तरयाशच बाह्या अलक्ष्मी :||

उपैतु मां देवसख : कीर्तिश्चामणिना सह |

प्रादुर्भूतो सुराष्ट्रेस्मिन कीर्तिम्रिद्धिम ददातु में ||

क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठां अलक्ष्मी नाशयाम्यहम |

अभूतिमसम्रिद्धिम च सर्वानिर्णुद में ग्रिहात ||

गंधद्वारं दुराधर्षाम नित्य पुष्टं करीशिनिम |

इश्वरिम सर्वभूतानाम तामिहोपह्व्ये श्रियं ||

मनस : काममाकुतिम वाच: सत्याम्शीमही |

पाशुनाम रूपमन्यास्य मयि श्री : श्रयतां यश :||

कर्दमेन प्रजाभूता मयि संभव कर्दम |

श्रियं वासय में कुले मातरम् पध्ममालिनीम ||

आप: स्राजन्तु स्निग्धानी चिक्लित वस् में ग्रिहे |

नि च देवीम मातरम श्रियं वासय में कुले ||

आद्राम पुषकरिनीम पुष्टिम पिंगलाम पद्मामलिनिम |

चन्द्रां हिरान्यमायी लक्षमिम जातवेदो म आवह ||

अद्राम या : करिनिम यष्टिम सुवर्णं हेममालिनीम |

सुर्याम हिरणमयी लक्ष्मी जातवेदो म आवह ||

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम |

यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो

दास्योश्वान विन्देयं पुरुषानहम ||

या: शुची: प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमंवहम |

सूक्तं पंच्दर्शचंच श्रीकाम: सततं जपेत ||

पध्मानने पध्मउरु पध्माक्षी पध्मसंभवे |

तन्मे भजसि पध्माक्षी येन सौख्यं लभाम्यहम ||

अश्वदायै गोदायै धनदायै महाधने |

धनं में लाभतां देवी सर्वकामान्श्च देहि में ||

पुत्रपौत्रं धनंधान्यं हस्तयाशवादिगवेर्थम |

प्रजानाम भवसि माता अयुष्मनतम करोतु में ||

धनंअग्निर धनंवायुर धनंसूर्यो धनंवसु |

धनमिन्द्रो ब्रहास्पतिर्वरुनम धनमस्तु में ||

वैनतेय सोमं पिब सोमं पिबतु व्रित्रहा |

सोमं धनस्य सोमिनो मह्यं ददातु सोमिनः ||

न क्रोधो न च मात्सर्यं न लोभो नशुभामती |

भवन्ति क्रित्पुन्यानाम भक्तानाम श्री सूक्तं जपेत सदा ||

वर्शन्तु ते विभावरी दिवो अभ्रस्य विदयुत:|

रोहंतु सर्व बीज्यान्य व ब्रम्हद्विषोजही ||

पध्मप्रिये पधमिनी पध्महस्ते पध्ममालये

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