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Veena Panchal

Untitled
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Style: indie rock, guitar, drums, bass, 115 bpm, dreamy, authentic, lo-fi, introspective, Heavy bass, male vocal, happy
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॥ दोहा ॥
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवनकुमार ।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥
॥ चौपाई ॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ १ ॥
राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनिपुत्र पवनसुत नामा ॥ २ ॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ॥ ३ ॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुंडल कुंचित केसा ॥ ४ ॥
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥ ५ ॥
शंकर सुवन केसरीनंदन । तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥ ६ ॥
बिद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥ ७ ॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥ ८ ॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥ ९ ॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचन्द्र के काज सँवारे ॥ १० ॥
लाय सजीवन लखन जियाये । श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥ ११ ॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥ १२ ॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥ १३ ॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥ १४ ॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥ १५ ॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥ १६ ॥
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना । लंकेस्वर भए सब जग जाना ॥ १७ ॥
जुग सहस्र जोजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ १८ ॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥ १९ ॥
दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥ २० ॥
राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आग्या बिनु पैसारे ॥ २१ ॥
सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रक्षक काहू को डर ना ॥ २२ ॥
आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥ २३ ॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ॥ २४ ॥
नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥ २५ ॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥ २६ ॥
सब पर राम तपस्वी राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ॥ २७ ॥
और मनोरथ जो कोई लावै । सोई अमित जीवन फल पावै ॥ २८ ॥
चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥ २९ ॥
साधु संत के तुम रखवारे । असुर निकंदन राम दुलारे ॥ ३० ॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥ ३१ ॥
राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥ ३२ ॥
तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ॥ ३३ ॥
अन्त काल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥ ३४ ॥
और देबता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥ ३५ ॥
संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥ ३६ ॥
जै जै जै हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥ ३७ ॥
जो सत बार पाठ कर कोई । छूटहि बंदि महा सुख होई ॥ ३८ ॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्ध साखी गौरीसा ॥ ३९ ॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय मँह डेरा ॥ ४० ॥
॥ दोहा ॥
पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥