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केरवा के पात पर
Folk

केरवा के पात पर

M
Manu Ojha
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Style: 🎵 मुखड़ा (शुरुआत) केरवा के पात पर, ओसवा के बूँदिया, महके लगल गाँव के गलिया। सूपवा सजवलीं, दउरा उठवलीं, लेके अरघ के थरिया। आ जइहऽ छठी मइया, अँगना हमार, तोहरे से रोशन बा घर-परिवार। सुरुज देवता के किरिनिया पुकारे, भर दीं खुशियन से झोली हमार।। छठी मइया हो... छठी मइया हो... तोहरे महिमा अपार, छठी मइया हो... छठी मइया हो... राखीं सबके लाज।। 🎵 अंतरा 1 — घाट के तैयारी गंगा जी के घाटे-घाटे, दीप जरावल जाई, माई के गीतवा गावत, दुनिया झूमी जाई। ठेकुआ के खुशबू से महके घर-दुआर, नारियल, निम्बू, फलवा से सजल दउरा हमार। माथे पर दउरा, मनवा में आस, छठी मइया पूरिहें सबके अरदास। लाल-लाल चुनरिया, सिंदूर के धार, माई के चरण में बा सगरी संसार।। छठी मइया हो... छठी मइया हो... तोहरे महिमा अपार, छठी मइया हो... छठी मइया हो... राखीं सबके लाज।। 🎵 अंतरा 2 — डूबत सुरुज के अरघ साँझ के बेरा भइल, घाट सज गइल, भक्ति के रंग में संसार रँग गइल। हाथ जोड़ि मइया, विनती सुनऽ हमार, सुखी रहे दुनिया, बसल रहे प्यार। डूबत सुरुज के अरघिया चढ़ाइब, नयन में नीर लेके गीतवा सुनाइब। घर-घर खुशहाली, हर मन में आस, माई तू पूरा करिहऽ सबके विश्वास।। ए छठी मइया, ए दीनानाथ, बनवले रहिहऽ सबके सिर पर हाथ। दुखवा मिटा दऽ, खुशिया बरसा दऽ, प्रेम से भर दऽ सगरी संसार।। 🎵 अंतरा 3 — भोर के अरघ भोर भइल धीरे-धीरे, पूरुब मुस्काइल, सुरुज देवता के किरिनिया लहराइल। जल में खड़ा होके जोहार करे संसार, छठी मइया पूरा करिहऽ सबके विचार। उगते सुरुज के अरघिया चढ़ावल, माई के चरण में माथवा झुकावल। घर में रहे ममता, अँगना में प्यार, हर जनम मिलत रहे माई के दुलार।। नन्हकी मुस्कान रहे ललना के ओठ, खुशियन से भरल रहे माई के कोठ। भइया रहे खुशहाल, बहिनी के मान, छठी मइया राखिहऽ सबके सम्मान।। 🎵 अंतिम मुखड़ा — भावुक समापन केरवा के पात पर, ओसवा के बूँदिया, महके लगल गाँव के गलिया। सूपवा सजवलीं, दउरा उठवलीं, लेके अरघ के थरिया। आ जइहऽ छठी मइया, अँगना हमार, तोहरे से रोशन बा घर-परिवार। सुरुज देवता के किरिनिया पुकारे, भर दीं खुशियन से झोली हमार।। जय हो छठी मइया... जय हो दीनानाथ... जय हो छठी मइया... रखिहऽ सबके साथ... जय हो छठी मइया... जय हो दीनानाथ... तोहरे चरण में बा हमार प्रणाम।। 🌅 जय छठी मइया! जय सुरुज देव! 🙏
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(हो... हो...)

केरवा के पात पर ओसवा के बूँदिया

केरवा के पात पर, ओसवा के बूँदिया

महके लगल गाँव के गलिया

सूपवा सजवलीं, दउरा उठवलीं

लेके अरघ के थरिया

आ जइहा छठी मइया, अँगना हमार

तोहरे से रोशन बा घर-परिवार

छठी मइया हो... छठी मइया हो...

तोहरे महिमा अपार

(छठी मइया हो... हो...)

राखीं सबके लाज

गंगा जी के घाटे-घाटे, दीप जरावल जाई

माई के गीतवा गावत, दुनिया झूमी जाई

ठेकुआ के खुशबू से महके घर-दुआर

नारियल, निम्बू, फलवा से सजल दउरा हमार

आ जइहा छठी मइया, अँगना हमार

तोहरे से रोशन बा घर-परिवार

छठी मइया हो... छठी मइया हो...

तोहरे महिमा अपार

(छठी मइया हो... हो...)

राखीं सबके लाज

डूबत सुरुज के अरघिया चढ़ाइब

नयन में नीर लेके गीतवा सुनाइब

उगते सुरुज के अरघिया चढ़ावल

माई के चरण में माथवा झुकावल

आ जइहा छठी मइया, अँगना हमार

तोहरे से रोशन बा घर-परिवार

छठी मइया हो... छठी मइया हो...

तोहरे महिमा अपार

(छठी मइया हो... हो...)

राखीं सबके लाज

जय हो छठी मइया... जय हो दीनानाथ...

तोहरे चरण में बा हमार प्रणाम

(छठी मइया हो... हो...)

(हो... हो... हो...)

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