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بين اتصال وصوت
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بين اتصال وصوت

ابو صقر عيسىابو صقر عيسى
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Lyrics

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(हो...)

तेरी यादों का सफ़र

दिल में लेके चला हूँ

फ़ोन मिलाया तुझे

पर तू मिली नहीं

तेरी घंटी बजी मगर

तूने सुना नहीं

मेरी बातें अधूरी

दिल में रह गईं

हर रात ये सवाल

मुझे जलाता है

तेरा दिल क्यों मुझसे

इतना दूर है

क्यों तूने दिल तोड़ा

(दिल तोड़ा...)

मेरी सुनती ही नहीं

मेरी सुनती ही नहीं

तेरी याद में जलूँ

(जलूँ, जलूँ...)

तेरे बिना मैं कहाँ

महीनों बीत गए

तेरा इंतज़ार किया

हर पल तुझको पुकारा

तूने ना जवाब दिया

अब आया हूँ तेरे पास

बातें करने को

पर तूने कहा मुझसे

अब देर हो गई

क्यों तूने दिल तोड़ा

(दिल तोड़ा...)

मेरी सुनती ही नहीं

मेरी सुनती ही नहीं

तेरी याद में जलूँ

(जलूँ, जलूँ...)

तेरे बिना मैं कहाँ

माफ़ी माँगूँ मैं

अपनी गलती का

एक मौक़ा दे मुझे

दिल की बात सुन ले

क्यों तूने दिल तोड़ा

(दिल तोड़ा...)

मेरी सुनती ही नहीं

मेरी सुनती ही नहीं

तेरी याद में जलूँ

(जलूँ, जलूँ...)

तेरे बिना मैं कहाँ

(हो...)

(तेरी यादें...)

(मेरी सुनती ही नहीं...)

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