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Satguru Bin Suna Sansar
Devotional

Satguru Bin Suna Sansar

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Lyrics

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(हो...)

सतगुरु बिन सूना लागे संसार

रंग महल में मन ना लागे

चाहे लाख हो श्र्रिंगार

मन मंदिर में ज्योत ना जागे

कैसे हो उद्धार

धन-दौलत और महल अटारी

सब रह जासी बीच मझधार

साथ चले ना कोई जग में

सतगुरु नाम ही पार

सतगुरु बिन सूना लागे संसार

(सूना लागे...)

झूठी माया झूठे रिश्ते

सतगुरु सच्चा आधार

(सच्चा आधार...)

सतगुरु मिले तो राह दिखाई

मन का मिट गया अंधियार

ग्यान का दीपक हाथ में देके

खोला भीतर का द्वार

कौन है अपना कौन पराया

समझाया सारा सार

भटके हुए मुसाफिर को गुरु ने

दिया प्रेम का उपहार

सतगुरु बिन सूना लागे संसार

(सूना लागे...)

झूठी माया झूठे रिश्ते

सतगुरु सच्चा आधार

(सच्चा आधार...)

काया माटी साँसें थोड़ी

समझ ले मन इस बार

राम नाम की लगन लगा ले

खुल जासी मुक्ति-द्वार

सतगुरु बिन सूना लागे संसार

(सूना लागे...)

झूठी माया झूठे रिश्ते

सतगुरु सच्चा आधार

(सच्चा आधार...)

(हो...)

सतगुरु बिन... सूना लागे संसार

(सूना लागे...)

(सतगुरु बिन...)

स्पष्टीकरण (Explanation):

इस गीत में मूल भावना को ध्यान में रखते हुए आठ से अधिक अंतराओं को संक्षिप्त करके एक प्रभावी तीन-मिनट की संरचना में ढाला गया है। मुखड़ा (Chorus) को तीन बार दोहराया गया है — जैसा कि भक्ति संगीत की परंपरा में होता है। अंतराओं में से मुख्य विषयों को चुना गया है: माया की नश्वरता, सतगुरु की महिमा, ग्यान का प्रकाश, और मुक्ति का मार्ग। ब्रिज में काया की नश्वरता और नाम जप का संदेश दिया गया है। आउट्रो में गीत धीरे-धीरे समाप्त होता है, जो ध्यान की स्थिति को दर्शाता है।

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