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PRANAV MODIPRANAV MODI
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Style: Traditional Shri Hanuman Chalisa, deep devotional male voice, clear Hindi Sanskrit pronunciation, slow and steady chanting, soft harmonium, gentle tabla, manjira, subtle temple bells, powerful bhakti bhav, peaceful temple ambience, minimal instrumental gaps, no voice trembling, no extra lyrics, sing the complete Hanuman Chalisa in the correct order.

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[Verse] श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ॥ [Verse] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर ॥ रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी ॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा ॥ हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे। काँधे मुंज जनेऊ साजे ॥ संकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥ बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर ॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया ॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा ॥ भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे ॥ लाय सजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥ रघुपति की बहुत बधाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥ सहस्र बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥ सनकादिक ब्रह्मामनि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा ॥ जम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते। कवि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥ तुम सुग्रीवहि कीन्ह उपारा। राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥ तुम्रो मन्त्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥ जुग सहस्र योजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ॥ दुर्गम kaj jagat de ke jete। सुगम अनुग्रह तुम्रे तेते ॥ राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ सब सुखा लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना ॥ आपन तेज संहारो आपै। तीनों लोक हाँक ते কাঁপै ॥ भूत पिशाच निकट नहीं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै ॥ नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥ संकट ते हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥ सब पर राम तपस्वी राजा। तिनके kaj sakal tum saja ॥ और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै ॥ चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा ॥ साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे ॥ अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस वर दीन जानकी माता ॥ राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा ॥ तुमरे भजन राम को पावै। जन्म जन्म के दुख बिसरावै ॥ अंतकाल रघुवर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई ॥ और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्व सुख करई ॥ संकट कटै मिटे सब पीरा। जो सुमरे हनुमत बलबीरा ॥ जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करो गुरुदेव की नाँई ॥ जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥ जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥ [Verse] पवनतनय संकट हरन, मूरति मंगल्र मूर। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥

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