
Aag Ka Dhvani
PRO & Creator Features
Unlock advanced AI features with Pro (Audio2Audio, Voice Clone, Photo Covers, LoRA) or Creator (Variations, Edit Sections, Stem Separation).
Audio2Audio Remix
Pro & Creator
Voice Clone
Pro & Creator
Create Variations
Creator only
Edit Sections
Creator only
Stem Separation
Creator only
Lyrics
▶ Play this song to follow along.
हिसाब बाकी
[Instrumental Intro – 8 bars, dark piano loop, dusty vinyl texture, heavy 808 bass, hard kick and snare, no vocals]
[Verse 1]
बातों का बादशाह, काम में फ़िसड्डी
महफ़िल में शेर, अकेले में बिल्ली
चेहरे पे रुतबा, किरदार में कमी
तेरी सारी अकड़ की कोई वजह नहीं
हर दूसरे दिन तेरा नया मुखौटा
सच सामने आया तो लहजा ही छोटा
नाम बड़ा करने का शौक़ तो बहुत
पर नाम के पीछे कोई काम ही नहीं
मैंने वक़्त दिया, वक़्त ने सिखाया
किस पर भरोसा, किसे दूर बनाया
तूने हर मोड़ पे किरदार बदला
मैंने बुरे वक़्त में भी उसूल न बदला
तेरी हर बात में ख़ुद की तारीफ़
मेरे हर बार में मेहनत की छाप
तू भीड़ देखकर अपना रुख़ बदलता
मैं भीड़ से अलग अपना रास्ता बनाता
[Chorus]
हिसाब बाकी, अभी बात बाकी
तेरी हर चाल की औक़ात बाकी
तू नाम के पीछे, मैं काम के पीछे
फ़र्क़ साफ़ दिखता है दोनों के बीच में
हिसाब बाकी, अभी रात बाकी
मेरी ख़ामोशी में भी बात बाकी
तू वक़्त के साथ अपना रंग बदल
मैं जैसा कल था, वैसा आज भी अटल
[Verse 2]
तेरा ग्यान उधार, तेरे दावे किराए
जहाँ फ़ायदा दिखा, वहीं रिश्ते बनाए
तू सच को घुमाकर कहानी बनाता
अपनी ही बातों में ख़ुद फँस जाता
तेरी पहचान तेरे साथ खड़े लोग
मेरी पहचान मेरा काम, मेरा सोच
तू नाम कमाने में चेहरा सजाए
मैं शब्दों से तस्वीर तेरी दिखाऊँ
हर बात पे राय, हर बात पे शोर
अंदर से ख़ाली, दिखावा भरपूर
तेरा हर तर्क बस बचने का रास्ता
सवाल जो सीधा, जवाब क्यों आधा?
मैंने नहीं सीखी तारीफ़ की भाषा
नक़ली उसूलों से नहीं कोई वास्ता
तू जीत के भी हर बार सफ़ाई दे
मैं हार से सीखूँ, फिर नई चाल खेलूँ
ना ताज की चाहत, ना झूठी वाहवाही
मेरी कलम बोले, तो बात बने भाई
तू मेरी जगह लेने के ख़्वाब सजाता
पहले अपने वजूद का वज़न तो बढ़ा
[Beat Switch – Half]
[Verse 3]
किरदार की क़ीमत कपड़ों से मत आँक
हर चमकती चीज़ को सोना न मान
जो पीठ के पीछे तेरा नाम उछालें
वही सामने आकर अपने बन जाएँ
मैंने भी देखे हैं चेहरे हज़ार
कुछ मीठे लफ़्ज़ों में, कुछ सीधे वार
फ़र्क़ बस इतना, अब समझ गया हूँ
हर हाथ मिलाने वाले को अपना न मानूँ
तू ख़ुद को समझे इस खेल का उस्ताद
तेरी हर चाल का मिलता जवाब
मैं बातें कम, नतीजे ज़्यादा रखूँ
जो सच है वही अपनी ज़ुबाँ पे रखूँ
ना नक़ली गैंग, ना उधार का नाम
ना चार लोगों से माँगा मुक़ाम
जो कुछ भी बनाया, अपने दम पर
मेरी पहचान खड़ी मेरे अपने हुनर पर
[Final Hook – Full drums, heavy bass, layered vocals]
हिसाब बाकी, अभी बात बाकी
तेरी हर चाल की औक़ात बाकी
तू नाम के पीछे, मैं काम के पीछे
फ़र्क़ साफ़ दिखता है दोनों के बीच में
हिसाब बाकी, अभी रात बाकी
मेरी ख़ामो