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Riot Pulse
Hard Rock

Riot Pulse

ATUL KUMARATUL KUMAR
0 likes1 plays4:59
Style: rock, electric guitar, drums, bass, 130 bpm, energetic, rebellious, gritty, raw vocals
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Lyrics

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[Intro]

यहाँ सच से ज़्यादा, सच का तमाशा बिकता है,

जो आईना दिखाए, वही आँखों में खटकता है।

किसी की ख़ामोशी को उसकी हार मत समझना,

यहाँ बोलने वाला भीड़ में सबसे अकेला दिखता है।

[Verse 1]

कल तक जो साथ थे, आज हिसाब माँगते हैं,

मेरे ही ख़्वाब मुझसे उनका जवाब माँगते हैं।

मैंने जो सच लिखा, तो सवाल मुझपे उठे,

झूठ के महल थे, मगर इल्ज़ाम मुझपे उठे।

चेहरों पे नेकी, दिलों में व्यापार है,

हर हाथ में पत्थर, हर ज़ुबाँ पे प्यार है।

यह कैसी बस्ती, कैसा इसका उसूल है?

गुनहगार मशहूर, बेक़सूर फ़िज़ूल है।

[Chorus]

मेरी क़लम का कसूर बता, मेरा सच गुनाह कैसे?

जो आँखों ने देखा है, वो झूठ हो जाए कैसे?

मैं वक़्त से पूछूँगा, ये फ़ैसले तेरे हैं क्या?

जो सच के साथ खड़ा रहा, वो ग़लत हो जाए कैसे?

[Verse 2]

नाम बड़ा हुआ तो अपने भी बदल गए,

कल तक जो अपने थे, वो रास्ते बदल गए।

मैंने तो माँगा था बस मेहनत का हिसाब,

बाज़ार में बिकने लगे रिश्तों के ख़िताब।

यहाँ आदमी की क़ीमत उसके नाम से लगे,

सच बोलने वाले पे इल्ज़ाम से लगे।

जो भीड़ के साथ चला, वो सही कहलाया,

जो अकेला सच बोला, वो बुरा कहलाया।

[Bridge]

माँ कहती थी बेटा, तू सच का साथ निभाना,

दुनिया चाहे कुछ भी कहे, सिर मत झुकाना।

माँ, तेरी बातों का कर्ज़ आज भी बाकी है,

जीत तो बहुत मिली, पर नींद अब आधी है।

[Final Hook — ऊँची आवाज़, भारी बीट]

मेरी क़लम का कसूर बता, मेरा सच गुनाह कैसे?

जो आँखों ने देखा है, वो झूठ हो जाए कैसे?

वक़्त की अदालत में सबका हिसाब होगा,

आज मेरा नाम सही, कल तेरा जवाब होगा।

[Outro]

मैंने दुनिया जीतने की ज़िद कभी की ही नहीं,

बस ख़ुद की नज़रों में गिरने की नौबत आने नहीं दी।

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